Maa Behan Movie Review: पिछले कुछ दिनों से माधुरी दीक्षित, तृप्ति डिमरी और रवि किशन की 'मां बहन' को लेकर जबरदस्त हल्ला था. माधुरी दीक्षित को लेकर जमकर कसीदे पढ़े जा रहे थे. फिर जिस तरह का ट्रेलर काटा गया, उससे लग रहा था कि अब तो कुछ गजब ही हो जाएगा. लेकिन ये क्या? जब मैंने गुरुवार की रात को इस फिल्म देखना शुरू किया तो मेरे मुंह से यही नहीं निकला, हे राम, ये क्या बना डाला. मेरे जेहन में यही बात आई कि 'फिल्म बनाने वाले ये तेरे मन में क्या समाई, दिमाग को दही करने वाली फिल्म क्यों बनाई.' बेशक को आपको लग सकता है कि इस फिल्म में ऐसा क्या था, तो लीजिए मैं आपको पूरा माजरा समझाता है.
मां बहन की कहानी
नेटफ्लिक्स की इस फिल्म की कहानी माधुरी दीक्षित और उनकी दो बेटियों की हैं. जिसमें एक बेटी तृप्ति डिमरी हैं. अब पहले सीन से ही डायरेक्टर इसको सनसनीखेज फिल्म बनाने की कोशिश करता है, इसलिए उसने सनसनी फेम श्रीवर्धन त्रिवेदी को फिल्म का सूत्रधार टाइप का कैरेक्टर बना दिया. अब माधुरी दीक्षित को डायरेक्टर क्या साबित करना चाहता है, ये समझ से परे है और शब्दों में तो कह ही नहीं सकते क्योंकि लिखने की मर्यादा होती है. शायद ओटीटी पर ऐसा कुछ होता नहीं है. कुल मिलाकर उसने माधुरी को एक बिगड़ैल इमेज के साथ पेश किया है. जिसका जीवन का एकमात्र उद्देश्य सिर्फ पुरुषों पर डोरे डालना है, फंसाना है और फिर मां बन जाना है.
अब एक दिन माधुरी दीक्षित अपनी बेटियों को कॉल करती हैं और रोती हैं, बताती हैं कि उनसे कुछ ऐसा हो गया है कि अब उन्हें आना पड़ेगा. ऐसा क्या हो गया है? उनसे रवि किशन का कत्ल हो गया है. बस यही इस फिल्म की गुत्थी नहीं है. असली पहेली तो इसके बाद शुरू होती है. डायरेक्टर ने एक शानदार मौका छोड़ दिया क्योंकि जिस तरह का माहौल शुरू में बना था वो फिल्म के आगे बढ़ते ही अपनी लय खो बैठता है. इस तरह फिल्म कहां जा रही है कुछ नहीं पता. डायरेक्टर समझ ही नहीं पा रहे हैं कि उन्होंमे क्या सोचा था और क्या कर डाला.
मां बहन में एक्टिंग
मैंने जो एक्टिंग की मिसाल इस फिल्म में देखी, उसने माधुरी दीक्षित और उनके साथ नजर आ रहे सारे कलाकारों की इमेज ही धराशायी हो गई. माधुरी दीक्षित एक्टिंग कर ही नहीं रही हैं. तृप्ति डिमरी ने कई सीन में कमाल किया है. उनका बोलने का अंदाज बहुत ही बढ़िया है. लेकिन डायरेक्टर ने ना जाने उन्हें क्या समझाया था कि अच्छी एक्टिंग करते-करते लाउड हो जाना है कि दर्शक सिर पीट लें. कुल मिलाकर जैसे-जैसे कलाकार एक-एक करके आते है, एक्टिंग का जौहर दिखाते हैं, मुंह से निकलता है OMG! कुल मिलाकर ओवरएक्टिंग, ओवरएक्टिंग और सिर्फ ओवरएक्टिंग.
फिल्म का डायरेक्शन
सुरेश त्रिवेणी इससे पहले सूबेदार, जलसा, तुम्हारी सुलू जैसी फिल्में बना चुके हैं. लेकिन यहां वो क्या कर बैठे, मेरी तो समझ से बाहर है. फिल्म बनाते-बनाते वो नौटंकी बना बैठे और वो भी औसत दर्जे की. डायरेक्शन दिशाहीन है. कहानी का टायर पूरी तरह पंक्चर है. कुल मिलाकर एक ओटीटी फिल्म से इतनी खराब रहने की उम्मीद नहीं होती.
मां बहन वर्डिक्ट
अगर आपको खतरों से खेलने की आदत है तो जरूर देख सकते हैं क्योंकि इसमें दिमाग के दही होने का पूरा खतरा है. फिल्म देखने के बाद माधुरी दीक्षित का चेहरा जेहन में बार-बार घूमता है. इतनी सीनियर एक्ट्रेस और उनसे यह क्या करवा डाला. एक बात और डायरेक्टर माधुरी की धक धक इमेज को ही फिल्म में लेकर आते हैं और बार-बार इस बात पर जोर दिया जाता है कि वो स्लीवलेस और बैकलेस ब्लाउज पहनती हैं, और हर वो काम करती हैं जो कथित शालीन महिलाएं नहीं करती हैं (बर्दाश्त से बाहर). बाकी फिल्म देखना ना देखना आपके स्वविवेक पर है. सिर्फ और सिर्फ फिल्म की शुरुआत और तृप्ति डिमरी के लिए फिल्म को एक स्टार.