कपूर खानदान की ये कहानी जितनी दिलचस्प है, उतनी ही चौंकाने वाली भी है. करिश्मा कपूर के बचपन की तस्वीरें आज भी लोगों का ध्यान खींच लेती हैं, क्योंकि उनमें उनकी आंखें बिल्कुल दादा राज कपूर जैसी नजर आती हैं. लेकिन असली ट्विस्ट उनके जन्म से जुड़ा है, जब राज कपूर अपनी पोती को देखने अस्पताल नहीं पहुंचे थे. उन्होंने पहले ही एक अजीब शर्त रख दी थी कि वो तभी आएंगे जब बच्ची की आंखें नीली होंगी. ये बात उस वक्त पूरे परिवार के लिए हैरानी भरी थी, लेकिन आगे जो हुआ उसने सबको खुश कर दिया.
दादा राज कपूर के करीब थीं करिश्मा कपूर
करिश्मा बचपन से ही अपने दादा के बेहद करीब रहीं और उनकी आंखों में वही चमक दिखती थी जो राज कपूर की पहचान थी. परिवार के लोग अक्सर कहते थे कि उनमें दादा की झलक साफ नजर आती है और यही वजह थी कि वो घर में खास मानी जाती थीं.
राज कपूर ने रखी थी शर्त
जब करिश्मा का जन्म हुआ, तब पूरा कपूर परिवार अस्पताल पहुंच गया था, लेकिन राज कपूर नहीं गए. उन्होंने साफ कह दिया था कि वो अपनी पोती को तभी देखेंगे जब उसकी आंखें नीली होंगी. ये शर्त सुनकर हर कोई हैरान रह गया था.
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पोती की नीली आंखों को देखने गए अस्पताल
जैसे ही राज कपूर को पता चला कि करिश्मा की आंखें बिल्कुल उनकी तरह नीली हैं, वो तुरंत उनसे मिलने पहुंचे. पोती को देखकर वो बेहद खुश हुए और उन्होंने राहत की सांस ली. उस पल ने दादा और पोती के रिश्ते को और मजबूत बना दिया.
दादा राज कपूर के साथ वक्त बिताती थीं करिश्मा कपूर
बचपन में करिश्मा अक्सर अपने दादा के साथ वक्त बिताती थीं और उनसे अपने सपने शेयर करती थीं. राज कपूर भी उन्हें काफी प्यार करते थे और हमेशा उनका हौसला बढ़ाते थे. उन्होंने ये तक कह दिया था कि करिश्मा आगे चलकर बड़ी स्टार बनेंगी.
मां ने की परवरिश
बाद में बबीता कपूर ने अपनी बेटियों की परवरिश अकेले की और करिश्मा के करियर में उनका बड़ा योगदान रहा. हालांकि, दादा राज कपूर का आशीर्वाद और भरोसा भी करिश्मा के सफर में हमेशा साथ रहा.