दो डायरेक्टर ने बनाई थी गोविंदा की ये फिल्म, डबल रोल में थे 3 स्टार, 1.86 करोड़ में बनी कमाए 24 करोड़, साउथ में बना रीमेक

तीन एक्टर्स के डबल रोल, जबरदस्त कॉमेडी और अलग कहानी…इन्हीं खूबियों ने इस फिल्म को उस साल की सबसे बड़ी हिट बना दिया. फिल्म में उस समय के सुपरस्टार गोविंदा के साथ-साथ कादर खान और राज बब्बर के भी डबल रोल थे.

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1993 की फिल्म आंखें थी सुपरहिट

तीन एक्टर्स के डबल रोल, जबरदस्त कॉमेडी और अलग कहानी…इन्हीं खूबियों ने इस फिल्म को उस साल की सबसे बड़ी हिट बना दिया. फिल्म में उस समय के सुपरस्टार गोविंदा के साथ-साथ कादर खान और राज बब्बर के भी डबल रोल थे. हम बात कर रहे हैं 1993 में आई फिल्म ‘आंखें' की. गोविंदा के साथ चंकी पांडे की कॉमेडी का अंदाज लोगों को इस कदर पसंद आया कि फिल्म और उसके गाने भी सुपर-डुपर हिट हो गए थे. आज भी इस फिल्म के मुरीद ऐसे हैं कि फिल्म को कई बार देख चुके हैं, लेकिन फिर भी बोर नहीं होते.

तीन कलाकार, डबल रोल का ट्विस्ट

फिल्म में गोविंदा शहरी और ग्रामीण दो अलग-अलग अंदाज में नजर आए. कादर खान के रोल के साथ भी ऐसा ही था. लेकिन राज बब्बर का एक रोल पॉजिटिव था और दूसरे में वो खलनायक बने थे. अपने अनोखे कॉन्सेप्ट, तेज रफ्तार कॉमेडी और दमदार किरदारों की वजह से यह फिल्म आज भी याद की जाती है. खास बात यह रही कि करीब 170 मिनट लंबी इस फिल्म ने दर्शकों को शुरू से आखिर तक बांधे रखा.

दो दिग्गज निर्देशकों की जुगलबंदी

‘आंखें' के साथ दो बड़े नाम जुड़े थे. फिल्म का निर्देशन डेविड धवन ने किया था, जबकि इसकी कहानी अनीस बज्मी ने लिखी थी. दोनों ही फिल्म इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान रखते हैं. फिल्म के निर्माता पहलाज निहलानी थे, जिन्होंने उस दौर में कई हिट फिल्में दीं.

कम बजट, बड़ी कमाई

फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त प्रदर्शन किया था. करीब 1.86 करोड़ रुपए में बनी इस फिल्म ने भारत में 12 करोड़ रुपए से ज्यादा की कमाई की. वहीं दुनियाभर में इसका कलेक्शन 24 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया था, जो उस समय के हिसाब से बड़ी सफलता मानी जाती है. ‘आंखें' की कामयाबी के बाद इसकी कहानी को साउथ इंडियन सिनेमा में भी अपनाया गया. 1995 में आई तेलुगु फिल्म ‘पोकिरी राजा' इसी फिल्म का रीमेक मानी जाती है, जिसमें वेंकटेश ने मुख्य भूमिका निभाई थी. इस रीमेक में भी डबल रोल का वही फार्मूला इस्तेमाल किया गया.

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ओरिजिनल नहीं थी कहानी

दिलचस्प बात यह है कि ‘आंखें' खुद भी पूरी तरह नई कहानी नहीं थी. यह फिल्म 1977 की कन्नड़ फिल्म ‘किट्टू पुट्टू' से प्रेरित थी. वहीं कन्नड़ फिल्म भी 1967 की तमिल फिल्म ‘अनुबावी राजा अनुबावी' से प्रभावित मानी जाती है. यानी एक ही कहानी अलग-अलग भाषाओं में अलग अंदाज में दर्शकों के सामने आई, लेकिन हिंदी में ‘आंखें' ने जिस तरह की सफलता हासिल की, उसने इसे यादगार फिल्मों की सूची में शामिल कर दिया.

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