दिलीप जोशी को कौन नहीं जानता. चलिए दिलीप जोशी नाम से याद ना आए तो आपको उनका दूसरा नाम बता देते हैं अरे दिलीप जोशी यानी अपने जेठा लाल. अब तो शायद कोई विरला ही हो जिसे इनके बारे में ना पता हो. आज जेठा लाल की चर्चा इसलिए क्योंकि आज यानी कि 26 मई को उनका जन्मदिन है. 26 मई 1968 को गुजरात के पोरबंदर के छोटे से गांव गोसा में एक गुजराती ब्राह्मण परिवार में दिलीप जोशी का जन्म हुआ. आज वो पूरे देश के दिलों में ‘जेठालाल चंपकलाल गड़ा' के नाम से बस चुके हैं, लेकिन उनकी सफलता की कहानी कोई रातों-रात मिली शौहरत नहीं बल्कि सालों के धैर्य, मेहनत और विश्वास की मिसाल है.
बचपन और एक्टिंग करियर की शुरुआत
दिलीप जोशी का बचपन मुंबई में बीता. महज 12 साल की उम्र से उन्होंने थिएटर की दुनिया में कदम रख दिया. स्कूल के नाटकों से शुरू करके उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय थिएटर (INT) में अपना टैलेंट दिखाया. ये सब कुछ BCA की पढ़ाई के साथ-साथ हो रहा था. उन्हें INT का बेस्ट एक्टर का पुरस्कार भी मिला. शुरुआत में उन्होंने बतौर बैकस्टेज आर्टिस्ट भी काम किया और हर किरदार के लिए उन्हें 50 रुपये मिलते थे. लेकिन वे मेहनत करते रहे कभी हार नहीं मानी.
मुंबई जैसे शहर में सपने देखना और उन्हें पूरा करना आसान नहीं था. एक समय ऐसा भी आया जब उनके बैंक अकाउंट में सिर्फ 25,000 रुपये थे और परिवार की जिम्मेदारियां सिर पर थीं.
फिल्मी सफर और शुरुआती संघर्ष
1989 में दिलीप जोशी ने सलमान खान की ब्लॉकबस्टर फिल्म मैंने प्यार किया से बॉलीवुड डेब्यू किया. शुरुआत छोटे रोल से हुई लेकिन उन्होंने हर मौके को सीखने का अवसर बनाया. इसके बाद शाहरुख खान के साथ वन टू का फोर और फिर भी दिल है हिंदुस्तानी जैसी फिल्मों में काम किया.
उन्होंने गुजराती नाटकों और थिएटर में भी अपनी छाप छोड़ी. कई सालों तक छोटे-छोटे रोल और सीरियल्स में काम करते रहे. इस दौरान उन्होंने एक ट्रैवल एजेंसी भी चलाई ताकि परिवार का गुजारा चल सके. दिलीप जोशी ने कभी वल्गर कॉमेडी या शॉर्टकट रास्ते नहीं अपनाए. उन्होंने हमेशा पॉजिटिव किरदारों को तरजीह दी.
तारक मेहता का उल्टा चश्मा: जिंदगी का टर्निंग पॉइंट
2008 में उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट आया. सोनी SAB चैनल पर शुरू हुए तारक मेहता का उल्टा चश्मा में उन्हें जेठालाल चंपकलाल गड़ा का रोल मिला. गोखुलधाम सोसाइटी का यह सिम्पल लेकिन चालाक व्यापारी जल्द ही पूरे भारत का पसंदीदा किरदार बन गया. जेठालाल की मस्ती, डरपोकपन, दयाबेन के लिए प्यार, चंपकलाल के साथ झगड़े और टप्पू के लिए प्यार ने लाखों दर्शकों को अपनी ओर खींचा. शो आज 18 साल से ज्यादा चल चुका है और अभी भी लाखों घरों में रोजाना हंसी बिखेर रहा है. दिलीप जोशी ने इस किरदार को इतना जिंदा कर दिया कि लोग उन्हें सड़क पर जेठालाल ही पुकारते हैं.
परिवार है दिलीप जोशी की असली ताकत
रियल लाइफ में दिलीप जोशी जितने मस्तमौला दिखते हैं, उतने ही संवेदनशील और परिवार को सबसे ऊपर रखने वाले इंसान हैं. उनकी पत्नी जयमाला जोशी उनके साथ पिछले कई सालों से मजबूती से खड़ी हैं. कपल के दो बच्चे हैं – बेटी नियति जोशी और बेटा ऋत्विक जोशी. दिलीप अक्सर कहते हैं कि परिवार ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है. शो के बिजी शेड्यूल के बावजूद वे बच्चों के साथ समय बिताने की कोशिश करते हैं. उनकी पत्नी जयमाला उनके संघर्ष के दिनों की साक्षी रही हैं और आज सफलता के पल भी साथ बांटती हैं.
चुनौतियां और सीख
दिलीप जोशी की कहानी सिर्फ सफलता की नहीं बल्कि संघर्ष की भी है. उन्होंने कई बार शो छोड़ने की सोची, लेकिन दर्शकों के प्यार ने उन्हें रोका. उन्होंने हमेशा साफ कहा कि वे ऐसे रोल चुनते हैं जो परिवार के साथ बैठकर देखा जा सकें. आज के दौर में जहां विवादित कंटेंट आसानी से चल जाता है, वहां दिलीप जोशी की क्लीन इमेज उनकी सबसे बड़ी पूंजी है.
आज क्या करते हैं दिलीप जोशी
2026 में भी वे पूरे जोश के साथ जेठालाल बनकर दर्शकों का मनोरंजन कर रहे हैं. उनकी पॉपुलैरिटी सिर्फ सिर्फ भारत तक सीमित नहीं, बल्कि विदेशों में भी करोड़ों भारतीय उन्हें प्यार करते हैं. वे सोशल मीडिया पर भी एक्टिंव हैं और फैंस से सीधा जुड़ते हैं.
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