धुरंधर देख आदित्य धर के मुरीद हुए रामगोपाल वर्मा, बोले- उनसे असिस्टेंट डायरेक्टर की नौकरी मांगने वाला हूं

निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने खुले दिल से आदित्य धर की तारीफ की. राम गोपाल वर्मा ने फिल्म की अपार सफलता को लेकर एनडीटीवी से खास बातचीत की, जहां उन्होंने फिल्म से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए...

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धुरंधर देख आदित्य धर के मुरीद हुए रामगोपाल वर्मा
नई दिल्ली:

'धुरंधर 2' इन सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. पहले पार्ट की तरह ही सेकेंड पार्ट को भी दर्शकों का खूब प्यार मिल रहा है. फिल्म इंडस्ट्री के लोग भी 'धुरंधर 2' देखने के बाद आदित्य धर के कायल हो चुके हैं. फिल्म निर्देशक राम गोपाल वर्मा भी 'धुरंधर' के रिलीज के बाद आदित्य धर के फैन बन चुके हैं. 'धुरंधर: द रिवेंज' के रिलीज से पहले ही उन्होंने फिल्म देख ली थी और फिल्म को साल की सबसे बड़ी फिल्म घोषित कर दिया था, बाद में वह आदित्य धर से मिलने के लिए पहुंचे. उन्होंने खुले दिल से आदित्य धर की तारीफ की. राम गोपाल वर्मा ने फिल्म की अपार सफलता को लेकर एनडीटीवी से खास बातचीत की, जहां उन्होंने फिल्म से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए...

 सवाल - आपने फिल्म तीन बार देखी?

जवाब - जी. पच्चीस मिनट ट्रेलर और ऐड्स चल रहे थे और पंद्रह-बीस मिनट इंटरवल—तो कुल मिलाकर चार घंटे चालीस मिनट देखने के बाद भी, एंड टाइटल्स में लोग उठे नहीं. दैट—I डोंट थिंक आई हैव सीन एनीथिंग लाइक दैट बिफोर.

 सवाल - धुरंधर से पहले जो सिनेमा आया, जैसे आरआरआर, पुष्पा, बाहुबली—जहां ग्रैविटी को मात देने वाले एक्शन थे—क्या आपको वो पसंद थे? या शुरू से आपको अपनी “शिवा स्टाइल” की फिल्में पसंद थीं?

जवाब - आई नेवर लाइक्ड दैट काइंड ऑफ सिनेमा. आई थिंक इट वर्क्स ऑन स्पेक्टेकल फॉर सम फैन-बेस्ड ऑडियंस. आखिरकार लोग वही देखते हैं जो उनकी पसंद होती है. अगर उनकी पसंद में एक बोरिंग फिल्म है जिसमें ग्रैविटी-डिफाइंग फाइट्स हैं, तो ठीक है—आप ताली मारेंगे, लेकिन धुरंधर में आप देखिए—कोई ताली नहीं बजाता, क्योंकि लोग स्टोरीटेलिंग में पूरी तरह डूबे हुए हैं.

सवाल - आजकल देशभक्ति से भरपूर सिनेमा चल रहा है—“नया भारत” जहां घर में घुसकर मारता है—ऐसे डायलॉग्स पर तालियां बजती हैं. क्या फिल्म की कामयाबी के पीछे यह भी एक वजह है?

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जवाब - सी, आई पर्सनली डोंट बिलीव कि फिल्में सिर्फ थीम्स पर काम करती हैं. थीम और फिल्म की मेकिंग अलग चीज़ें हैं. इस फिल्म में एक स्पाई है, तो उसमें अपने आप पैट्रियोटिज़्म आ जाता है, लेकिन उसे ओवरडू नहीं किया गया. ऐसा नहीं है कि रणवीर सिंह सनी देओल की तरह चिल्ला रहा है—कोई ड्रामाटिज़्म नहीं है. वो एक ऐसे इंसान की तरह लगता है जो सिचुएशन में फंसा हुआ है. पूरी फिल्म में एक बार भी “मैं देश के लिए करूं” जैसा डायलॉग नहीं है. सब लोग अपने-अपने काम और परिस्थितियों में हैं. वही रियलिज़्म काम करता है. मैं नहीं मानता कि फिल्म की सफलता सिर्फ पैट्रियोटिज़्म की वजह से है.

सवाल - इस फिल्म में आपका फेवरेट कैरेक्टर कौन सा है?

जवाब - रणवीर सिंह एक्स्ट्राऑर्डिनरी हैं और उनके हिसाब से कोई कम नहीं है. मुझे लगता है कि हर कैरेक्टर अच्छा है—कोई भी इससे बेहतर नहीं कर सकता था, चाहे रोल छोटा ही क्यों न हो.

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सवाल - म्यूज़िक ने भी एक तरह से फॉर्मेट तोड़ा है. कुछ गाने ऐसे लगते हैं कि यहां क्यों हैं—जैसे सत्तर-अस्सी के दशक का, किशोर कुमार स्टाइल का गाना.

जवाब - यह गाना स्टोरीटेलिंग के स्ट्रक्चर को तोड़ता है. जहां हमें लगता है कि डार्क और वायलेंट म्यूज़िक होना चाहिए, वहां अगर “तम्मा तम्मा” जैसा फुट-टैपिंग गाना आ जाए—लोग गाने लगते हैं, बात करने लगते हैं—यह आपको सरप्राइज़ करेगा. यह उस मोमेंट को सेलिब्रेट करता है, बजाय इसके कि जो स्पष्ट हो रहा है उसे ज़ोर देकर दिखाए. आदित्य धर ने म्यूज़िक को सिचुएशन को सेलिब्रेट करने के लिए इस्तेमाल किया है.

 सवाल - अब राम गोपाल वर्मा क्या तोड़ने की तैयारी कर रहे हैं?

जवाब - अभी मैं आदित्य धर के पास जाकर असिस्टेंट डायरेक्टर की नौकरी मांगने वाला हूं, उसके बाद देखूंगा.

सवाल - और ‘सरकार 3' की जो बात चल रही थी?

जवाब - यस, हैपनिंग, इट्स हैपनिंग.
 

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