धर्मेंद्र के जाने के बाद सूना हो गया उनका 100 एकड़ का फार्महाउस, ताजा वीडियो देख नम हो जाएंगी फैन्स की आंखें

बॉलीवुड के ही-मैन धर्मेंद्र को फिल्मों की दुनिया से ज्यादा सुकून अपने लोनावला के 100 एकड़ फार्महाउस में मिलता था. खेतों, पेड़ों और मिट्टी के बीच बिताए गए उनके पल आज भी लोगों के दिल को छू जाते हैं.

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धर्मेंद्र ने 24 नवंबर 2025 को इस दुनिया को अलविदा कहा
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नई दिल्ली:

बॉलीवुड के ही-मैन कहे जाने वाले धर्मेंद्र की पहचान सिर्फ एक सुपरस्टार की नहीं थी. उनके अंदर एक सच्चा किसान भी बसता था. फिल्मों की चमक-दमक, कैमरों की रोशनी और बड़े-बड़े सेट से दूर उन्हें असली खुशी मिलती थी अपने लोनावला वाले फार्महाउस में. करीब 100 एकड़ में फैली ये जगह उनके दिल के बहुत करीब थी. यहां की मिट्टी की खुशबू, खेतों की हरियाली और खुले आसमान के नीचे बिताए गए पल उन्हें सुकून देते थे. कई बार उनके वीडियो सामने आते थे जिनमें वो खेतों में घूमते हुए मुस्कुराते नजर आते थे. वो मिट्टी को हाथों से छूते, पेड़ों को प्यार से देखते और कहते कि असली जिंदगी तो यहीं है. आज जब धरमजी इस दुनिया में नहीं हैं, तो वही फार्महाउस भी जैसे उनकी कमी महसूस कर रहा है.

100 एकड़ में बसाया था अपना सुकून भरा संसार

लोनावला में फैला उनका फार्महाउस सिर्फ एक प्रॉपर्टी नहीं था, बल्कि उनके दिल का ठिकाना था. चारों तरफ फैले खेत, फलों के पेड़ और खुली हवा में उन्होंने अपने लिए एक छोटी-सी दुनिया बना ली थी. यहां आम, पपीता और कई तरह की सब्जियों की खेती होती थी. धरमजी को खेती से इतना लगाव था कि कई बार वो खुद खेतों में उतर जाते थे. मिट्टी को हाथों से पकड़कर देखना और पौधों को बढ़ते हुए देखना उन्हें बच्चों जैसी खुशी देता था.

यहां देखें धर्मेंद्र के फार्महाउस का वीडियो

दिल से किसान थे धरमजी

धर्मेंद्र का बचपन पंजाब के गांव में बीता था. शायद इसी वजह से गांव की सादगी और मिट्टी से जुड़ाव उनके दिल में हमेशा बना रहा. सुपरस्टार बनने के बाद भी वो अक्सर कहते थे कि उन्हें खेतों की खुशबू सबसे ज्यादा प्यारी लगती है. फार्महाउस में उनकी सुबह अक्सर खेतों की सैर से शुरू होती थी. कभी पेड़ों के नीचे बैठकर चाय पीते, कभी गायों को प्यार से सहलाते और कभी दूर तक फैले खेतों को देखते हुए मुस्कुरा देते.

अब सिर्फ यादों में गूंजती है धरमजी की हंसी

फिल्मी दुनिया में धर्मेंद्र ने 6 दशक से ज्यादा का लंबा सफर तय किया. लाखों लोग उन्हें पर्दे पर देखकर बड़े हुए. लेकिन जिंदगी के आखिरी सालों में उन्हें सबसे ज्यादा सुकून अपने इसी फार्महाउस में मिलता था. आज जब लोग उनके पुराने वीडियो देखते हैं, तो साफ महसूस होता है कि ये जगह उनके लिए कितनी खास थी. अब वही खेत, वही पेड़ और वही रास्ते जैसे चुपचाप उन्हें याद कर रहे हैं. जहां कभी धरमजी की खुलकर हंसने की आवाज गूंजती थी, वहां अब बस उनकी यादें रह गई हैं.

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