‘देउल बंद 2’ के डायरेक्टर प्रवीण तारडे का ऐलान, 'फिल्म का सारा मुनाफा सुसाइड करने वाले किसानों के बच्चों की शिक्षा पर खर्च होगा'

देऊल बंद 2 के डायरेक्टर परवीन तारडे से NDTV की खास बातचीत. तारडे ने बताया कि फिल्म का सारा प्रॉफिट सुसाइड करने वाले किसानों के बच्चों की शिक्षा पर खर्च किया जाएगा.

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'देऊल बंद 2' के डायरेक्टर प्रवीण तारडे का इंटरव्यू
IMDb
नई दिल्ली:

मराठी फिल्म 'देऊल बंद 2' बॉक्स ऑफिस पर बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित हुई है. लगभग 9.75 करोड़ रुपये के बजट में बनकर और 3-3.5 करोड़ रुपये की पब्लिसिटी कॉस्ट के साथ तैयार हुई इस फिल्म ने अब तक 60 करोड़ रुपये से ज्यादा का शानदार कारोबार कर लिया है. फिल्म के इस ऐतिहासिक चमत्कार को देखते हुए इसके जल्द ही 100 करोड़ के क्लब में शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है. NDTV नेटवर्क के एग्जीक्यूटिव एडिटर प्रशांत शिशोदिया ने फिल्म की इस ऐतिहासिक सफलता, इसकी संवेदनशील कहानी, बढ़ते शो और मेकर्स द्वारा फिल्म के मुनाफे को सुसाइड करने वाले किसानों के बच्चों की शिक्षा के लिए दान करने के नेक फैसले को लेकर निर्देशक प्रवीण विट्ठल तारडे से खास बातचीत की:

सवाल: सबसे पहले मैं यही पूछना चाहूंगा कि फिल्म जिस तरह से कर रही है, जिस तरह से कलेक्शन है और जो मैंने सुना है कि करीब साढ़े सात या आठ करोड़ के बजट में फिल्म थी और जिस तरह का कारोबार फिल्म कर रही है, तो आपको इसकी उम्मीद थी, एक्सपेक्टेशन थी? और अभी जब अच्छा कारोबार हो रहा है तो आपको लग रहा है कि फिल्म इंडस्ट्री के लिए, जहां लोग बड़ी-बड़ी फिल्मों का मुंह ताक रहे हैं, आपकी फिल्म ने भी एक बड़ा योगदान दिया है?
जवाब: (हंसते हुए) धन्यवाद. फिल्म हमारी बनी थी 9.75 करोड़ में, और तीन-साढ़े तीन करोड़ की पब्लिसिटी थी. और अब भी पब्लिसिटी पे वो खर्चा कर रहे हैं, तो शायद चलो पकड़ो 14-15 तक जाएगी फिल्म. लेकिन, जिस तरह से बिज़नेस कर रही है, वो अलग है. आज से पहले मेरी जो 'धर्मवीर' आई थी, 'मुक्काम पोस्ट ठाणे', वो गई थी 35-40 तक. तो मुझे लगा था उस तक तो जाएगी. लेकिन ये तो अभी ही, 60 के आसपास आ गई है. अब भी जोर-शोर से चल रही है तीसरे हफ्ते में. तो शायद जाएगी, 100 करोड़ तक जा सकती है.

सवाल: क्या बात है! इससे पहले 'शिवाजी' 100 करोड़ के आसपास पहुंच गई, अभी यह भी 100 के आसपास जाएगी, तो मेरे ख्याल में फिल्मों के लिए अच्छी बात है. लेकिन, जिस तरह से शो भी बढ़ रहे हैं, आप किस तरह से शो बढ़ते हुए देख रहे हैं मल्टीप्लेक्सिस में? और अलग-अलग जगह कहां-कहां से डिमांड आ रही है कि शो बढ़ाए जाएं?
जवाब: शो ना, यह... यह बहुत अच्छी तरह से हो रहा है. क्या है, गाँव-गाँव में, जहाँ जिले में, छोटे से पाड़े (कस्बे) में, छोटे से डिस्ट्रिक्ट में, जहां लोग फिल्में नहीं देखते थे मराठी, वो भी लोग घर से बाहर निकलकर अपने-अपने आसपास के थिएटर में जा रहे हैं. मल्टीप्लेक्स में शो बढ़ रहे हैं. तो यह ना, सब लोगों की वजह से हो रहा है. इसलिए क्या बोलते हैं ना कि लोगों के हाथ में गई है अब 'देऊल बंद पार्ट 2'. तो यह थोड़ा सा चमत्कार जैसा ही है, लेकिन ऐसा ही होना चाहिए. मराठी फिल्में अगर, हर फिल्म 100 करोड़ के आसपास जाएगी, तो बहुत अच्छे दिन हैं मराठी फिल्म इंडस्ट्री के लिए.

सवाल: शुरुआत जब आपने की थी, तो कितने शोज, कितनी स्क्रीन्स आपने लिए थे और अब कितने हो गए हैं?
जवाब: सबसे पहले तो फिल्म स्टार्ट हुई थी 600-700 स्क्रीन्स में. और पहले हफ्ते में ही वो गए थे 2,200 तक. तो यह इतना बढ़ता ही जा रहा है, बढ़ता ही जा रहा है. तो अच्छी बात है.

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सवाल: अभी कितने स्क्रीन्स होंगे?
जवाब: अभी तो वो पता नहीं, लेकिन बहुत स्क्रीन होंगे. 1,000 से तो आगे होंगे ही होंगे.

सवाल: 2,000 से तो ज्यादा आप पहले ही बोल रहे थे, मतलब 3,000 के...
जवाब: हां, नहीं नहीं नहीं. तीसरे हफ्ते में क्या होता है, तीसरे हफ्ते में दो हिंदी फिल्में आ गईं, तीन मराठी फिल्में आ गईं, लेकिन इतनी सारी नई फिल्में आने के बाद में, मतलब 'बंदर' आई, 'पेड्डी' आई रामचरण की, लेकिन फिर भी 'पेड्डी', 'बंदर' इनसे भी ज्यादा शो 'देऊल बंद' को हैं. और थिएटर वालों ने खुद दिए हैं. हमारी तो इतनी पहुंच नहीं है कि हम लोग इतने शो पकड़ सकते हैं, लेकिन फिल्म ही चल रही है, तो लोग भी, मल्टीप्लेक्स भी शो दे रहे हैं.

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सवाल: क्या लगता है आपको कि फिल्म, ऐसी कौन सी चीज है फिल्म की जो दर्शकों के साथ इस तरह से रिएक्ट कर रही है, प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं? ऐसी कौन सी चीज है, इस फिल्म का जो थीम है, जो कांसेप्ट है, क्या वो विनर है? आप तो हैं ही हैं, डायरेक्टर हैं आप?
जवाब: यह तो पार्ट 2 है. 10 साल पहले इसका पार्ट 1 आया था. वो भी उस वक्त सक्सेसफुल ही था, सुपरहिट फिल्म थी. लेकिन इस बार क्या हुआ, थोड़ा सा ना मेरे बीच में जो दो-तीन फिल्में भी सुपरहिट गई थीं, जैसे कि 'मुलशी पैटर्न', जिस पे सलमान भाईजान ने 'अंतिम' नाम की फिल्म बनाई थी. वो मेरी ही फिल्म थी. में भी उसके रीमेक हो गए, तो मेरा ऑडियंस बढ़ गया था. लेकिन, यह जिस तरह से जा रही है फिल्म, इसमें हीरोइन जो है स्नेहल, उसकी एक्टिंग, सीनियर आर्टिस्ट मोहन जोशी, उनकी एक्टिंग, और किसानों का जो प्रश्न मैंने उठाया है कि यह फिल्म जो भी किसान देखेगा, वो सुसाइड नहीं करेगा. यह मैंने लाइन दी थी ना वन-लाइन. तो वो वन-लाइन सबसे हिट गई.

सवाल: आप इस बारे में कुछ और बताएंगे.
जवाब: हां तो, वो लाइन हिट गई. मैंने हिट फिल्में दी हैं, लेकिन मैं क्या हूं? मैं किसान हूं. मेरे दादा, परदादा, पिताजी सब किसान हैं. तो महाराष्ट्र में हर किसी का कोई दो जनरेशन पीछे किसान ही है. तो किसानों की यह स्टोरी लोगों को बहुत अच्छी लगी और वो भी मैंने बताई कैसे? भगवान के मुंह से. तो भगवान आया है ना खेती करने. तो वो मजा बहुत आया, लोगों को वो कंटेंट बहुत अच्छा लगा.

सवाल: यह बताइए कि अब जब फिल्म इतनी बड़ी फिल्म हिट हो गई, तो आप ऐसा कुछ सोच रहे हैं कि इसको हिंदी में भी डब करके और ऑडियंस तक पहुंचाया जाए?
जवाब: मैं ऐसा करता नहीं ज्यादा, क्योंकि मैं मराठी में ही बहुत रिलीज करता हूं फिल्म और मराठी में ही बनाता हूं. एक-दो हिंदी की भी बड़ी ऑफर आई, लेकिन मेरा इंट्रेस्ट ज्यादातर लोकल लैंग्वेज में ही है क्योंकि यह मेरे जड़ों की कहानी है. इंडिया में सबसे पहले जो किसान का सुसाइड हुआ था वो महाराष्ट्र में हुआ, यवतमाल जिले में. तो मेरे मन को लगा कि वो सुसाइड हुआ और उसके बाद सुसाइड-सुसाइड और आज नंबर इतने ऊपर गए. तो मुझे, अगर महाराष्ट्र में पहला सुसाइड हुआ था किसान का, तो इसी महाराष्ट्र की फिल्म ऐसी बनेगी जो किसानों का सुसाइड रोक देगी.

सवाल: क्या बात है! आखिरी चीज पूछूंगा आपसे कि कोई ऐसी चीज आप बताना चाहेंगे हमारे ऑडियंस को कि ऑडियंस ने पिक्चर देख ली, लोग फिल्म देख रहे हैं, आपकी वाह-वाही, तारीफ आपकी हो रही है, लेकिन कई बार फिल्म, कोई भी फिल्म एक ऐसी कहानी छोड़ जाती है जो आपके साथ सारी जिंदगी के लिए रह जाती है, जो ऑडियंस को नहीं पता लगती, मीडिया को नहीं पता लगती. कोई ऐसी बात आप बताना चाहेंगे इस फिल्म से रिलेटेड?
जवाब: मेरे जो प्रोड्यूसर हैं, वो खुद भी किसान हैं. अब इतना पैसा मिलने के बाद किसी की भी नीयत थोड़ी सी इधर-उधर हो सकती है, बराबर कि नहीं? इतना प्रॉफिट हुआ. लेकिन कैलाश वाणी नाम का जो मराठी प्रोड्यूसर है फिल्म का, लेकिन उन्होंने सब प्रॉफिट डोनेट करने की घोषणा की. वो बोले, 'मुझे इस फिल्म से जितना भी प्रॉफिट हो रहा है, मैं वो सारा प्रॉफिट जिन किसानों ने सुसाइड किया है, उनके बच्चों का जो एजुकेशन रुका है, मैं सारे पैसे उनके एजुकेशन के लिए दूंगा. तो इतनी बड़ी फिल्म के पीछे इतना बड़ा थॉट है. आई थिंक इसीलिए भगवान भी इस फिल्म के पीछे डट के ऐसे खड़े रहे हैं कि चलो, आप 100 करोड़ क्रॉस कर लो.

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