जब आशा भोसले ने जाहिर की दिल की आखिरी ख्वाहिश, 'मैं चाहती हूं कि गाते-गाते मौत आ जाए बस'

संगीत की साधना करने वाली आशा भोसले ने एक बार सिंगिंग रियलिटी टीवी शो में अपनी आखिरी इच्छा भी जाहिर की थी, जो संगीत से ही जुड़ी थी. उन्होंने बताया था, ''मैं चाहती हूं कि गाते-गाते मौत आ जाए बस, और मुझे कुछ नहीं चाहिए.''

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आशा भोसले ने जाहिर की दिल की आखिरी ख्वाहिश
नई दिल्ली:

वो आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई, जिसने कभी गुनगुनाया था ‘अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं...' अपनी जादुई आवाज के दम पर भारतीय संगीत जगत को सात दशकों तक रोशन करने वाली सुरों की आशा अब हमारे बीच नहीं हैं , मगर उनके गाए गाने, किस्से और यादें हमेशा प्रशंसकों के लिए खास बनी रहेगी. आशा भोसले का नौ साल की उम्र में शुरू संगीतमय सफर 92 वर्ष की आयु में थम गया और मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में शनिवार रात हृदय और सांस संबंधी परेशानी के बाद उन्होंने दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया. आशा ताई के जाने से न सिर्फ बॉलीवुड, बल्कि पूरे संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. ऐसे में उनका गाया गाना 'अभी न जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं'... जख्म को कुरेदता है. आज उन्होंने खुद यह वादा तोड़ दिया. उनकी आवाज अब कभी नहीं गूंजेगी, लेकिन उनके गाए गाने सदियों तक लोगों के दिलों में बसे रहेंगे.

संगीत की साधना करने वाली आशा भोसले ने एक बार सिंगिंग रियलिटी टीवी शो में अपनी आखिरी इच्छा भी जाहिर की थी, जो संगीत से ही जुड़ी थी. उन्होंने बताया था, ''मैं चाहती हूं कि गाते-गाते मौत आ जाए बस, और मुझे कुछ नहीं चाहिए.''

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आशा भोसले ने मात्र 9 साल की उम्र से गाना शुरू किया था. उन्होंने साल 1943 में अपना पहला फिल्मी गाना रिकॉर्ड किया. शुरू में उन्हें ज्यादातर कैबरे और डांस नंबर्स ही मिलते थे, लेकिन अपनी लगन और अद्भुत प्रतिभा से उन्होंने हर तरह के गानों में महारत हासिल कर ली. उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर के बाद वह हिंदी सिनेमा की शानदार गायिका बन गईं.

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आशा भोसले ने न सिर्फ फिल्मी गीत गाए, बल्कि गजलें, भजन और शास्त्रीय संगीत आधारित गाने भी बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत किए. फिल्म ‘उमराव जान' में उनकी गजलें आज भी लोगों की खास हैं. आशा भोसले ने हजारों गाने गाए और हर पीढ़ी को अपनी आवाज से जोड़ा.

'अभी न जाओ छोड़कर' भी उन शानदार आशा ताई के सदाबहार गानों में से एक है. इसकी गिनती आशा भोसले के सबसे रोमांटिक और अमर गाने में की जाती है. 1961 में रिलीज फिल्म ‘हम दोनों' में देव आनंद और साधना पर फिल्माया गया यह गाना मोहम्मद रफी और आशा भोसले की जोड़ी ने गाया था. जयदेव का संगीत और साहिर लुधियानवी के शब्द वाला यह 4 मिनट 8 सेकंड का गीत रिलीज होते ही सुपरहिट हो गया.

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यह गाना जुदाई से पहले की मीठी-मीठी भावनाओं को बेहद कोमल तरीके से बयां करता है. आज भी यह गाना रेडियो, यूट्यूब, स्टेज शो और सोशल मीडिया पर बार-बार सुना जाता है. श्रोता इसे सुनकर भावुक हो जाते हैं.

आशा भोसले अपने लंबे करियर में केवल रोमांटिक अंदाज वाले गानों तक सीमित नहीं थी, उन्होंने हर अंदाज के गाने गाए, चुलबुले, रोमांटिक, गंभीर गजलें और भजन, लाइट व पार्टी सॉन्ग्स भी. उनकी आवाज में एक अनोखा जादू था, जो सुनने वाले के मन को छू जाता था. उन्होंने सैकड़ों फिल्मों के लिए आवाज दी और हर गाने को अपनी पहचान बना दी.

 

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