धर्मेंद्र की 57 साल पुरानी फिल्म से लिया आइडिया, मूवी में अमिताभ बच्चन को बनाया हीरो, निकली ब्लॉकबस्टर, जितेंद्र-राजेंद्र भी थे रेस में

धर्मेंद्र की एक फिल्म 1968 में रिलीज हुई थी. फिर इसी फिल्म पर आधारित एक और मूवी बनी जिसमें अमिताभ बच्चन थे और साल था 1978. जानते हैं इस फिल्म का नाम और ये दिलचस्प किस्सा.

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57 साल पुरानी फिल्म से लिया आइडिया
नई दिल्ली:

Dharmendra 57 year old movie: हिंदी सिनेमा में ऐसी कई फिल्में हैं, जिनके प्लॉट और कहानी एक जैसे लगते हैं, बावजूद इसके वो हिट साबित हुई हैं. कभी-कभी एक जैसी कहानी की दोनों फिल्में हिट हुई तो कभी एक हिट और दूसरी फ्लॉप साबित हुई. ऐसा ही हुआ था उस फिल्म के साथ, जो साल 1968 में रिलीज हुई फिल्म की कहानी से मिलती जुलती थी. इस फिल्म में धर्मेंद्र-तनुजा और जयललिता मुख्य रोल में नजर आए थे. वहीं, दूसरी फिल्म में अमिताभ बच्चन, शशि कपूर, संजीव कुमार अहम किरदार में थे. चौंकाने वाली बात यह है कि अमिताभ और शशि कपूर स्टारर फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट हो गई और जिस फिल्म से इसकी कहानी ली गई वो फ्लॉप साबित हुई. आइए जानते हैं इन दोनों फिल्मों के बारे में.

कौनसी है ये दोनों फिल्में

अमिताभ बच्चन और शशि कपूर की यह फिल्म त्रिशूल है, जो साल 1978 में रिलीज हुई थी. इसे यश चोपड़ा ने डायरेक्ट किया था. इस फिल्म का बेसिक आइडिया साल 1968 में रिलीज हुई धर्मेंद्र स्टारर फिल्म इज्जत से लिया गया था. इस फिल्म को बनाने के लिए राजेंद्र कुमार और जितेंद्र भी रेस में शामिल थे. बाद में यह फिल्म यश चोपड़ा के हाथ लगी. फिल्म रिलीज होते ही हिट हो गई और बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया.

यह 1978 की दूसरी सबसे कमाऊ फिल्म उभरकर सामने आई थी. इस फिल्म की पूरी स्टारकास्ट में अमिताभ बच्चन, राखी, शशि कपूर, हेमा मालिनी, पूनम ढिल्लो, संजीव कुमार और सचिन पिलगांवकर थे. इस फिल्म की कहानी सलीम-जावेद ने लिखी थी. फिल्म में खय्याम का म्यूजिक था और इस फिल्म के सभी गाने हिट हुए थे.

फिल्म बनाने पर अड़े थे ये दो स्टार

1960 के दशक में निर्माता आरसी कुमार ने डायरेक्टर दुलाल गुहा को एक फिल्म के लिए बुलाया था. इस फिल्म का नाम बिन मांगे मोती था. इस फिल्म को धर्मेंद्र और मीना कुमारी के साथ बनाया जाना था, लेकिन  इसकी कहानी दिल एक मंदिर, फूल और पत्थर से मिलती जुलती थी. इसलिए इस फिल्म पर ताला लग गया. इसके बाद दुलाल गुहा ने आरसी कुमार को एक कहानी दी और इस फिल्म का नाम रखा गया 'इज्जत'. इस फिल्म का निर्देशन टी. प्रकाश राव ने किया था. फिल्म में लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का म्यूजिक था.

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इज्जत का गाना 'ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं, हम क्या करें' आज भी सुना जाता है. वहीं, इज्जत की कहानी से इंस्पायर्ड होकर सलीम-जावेद ने इससे मिलती-जुलती एक कहानी लिखी और सबसे पहले जितेंद्र को इसकी कहानी सुनाई. वहीं, सलीम-जावेद ने यह कहानी राजेंद्र कुमार को भी सुनाई थी. दोनों ही एक्टर दुलाल गुहा से यह फिल्म बनवाना चाहते थे, लेकिन विवाद बढ़ता देख दुलाल ने दोनों के साइनिंग अमाउंट वापस कर फिल्म करने से इनकार कर दिया. फिर यह स्टोरी दुलाल ने गुलशन राय के जरिए यश चोपड़ा को सुनाई.

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