IAS बनना चाहता था यह एक्टर, बाप था थिएटर मालिक, फिर बेचनी पड़ी चाय और लॉटरी टिकट, 22 की उम्र में किया 70 साल का रोल जानते हैं नाम ?

इस एक्टर की अदायगी देखने के बाद आपके चेहरे पर एक पल को भी हंसी नहीं रुकेगी. कॉमेडी करने में यह एक्टर बड़ों-बड़ों का उस्ताद है.

विज्ञापन
Read Time: 3 mins
IAS बनना चाहता था ये एक्टर
नई दिल्ली:

बॉलीवुड में बहुत कम स्टार हैं, जो ज्यादा पढ़े-लिखे हैं. रंगमंच की दुनिया में वैसे भी पढ़ाई की कम और बेहतरीन एक्टिंग की ज्यादा डिमांड है. इसलिए एक्टिंग फील्ड में आने वाले कलाकार पढ़ाई से ज्यादा एक्टिंग पर ध्यान देते हैं. बात करेंगे उस कलाकार की, जो आईएएस बनना चाहता था, लेकिन घर से उन्हें बचपन से ही रंगमंच का माहौल मिला. इस एक्टर के पिता थिएटर कंपनी चलाया करते थे. ऐसे में इस एक्टर को कला विरासत में मिली और यह इसका बखूबी फायदा भी उठा रहा है. हालांकि यह एक्टर घर के बुरे हालात होने के बाद अपने आईएएस बनने के सपने से हाथ धो बैठा. हालात इतने बदतर हुए कि चाय तक बेचनी पड़ी. थिएटर से निकले इस स्टार ने महज 22 साल की उम्र में एक 70 साल के बुजुर्ग का रोल प्ले किया था. आइए जानते हैं आखिर कौन हे यह एक्टिंग का उस्ताद.

मजबूरी में छोड़नी पड़ी पढ़ाई
दरअसल, यहां बात हो रही है अनिल कपूर की... नहीं झक्कास वाले अनिल कपूर नहीं बल्कि वो अनिल कपूर, जिन्हें हम अनु कपूर के नाम से जानते हैं. अनु कपूर ने अनिल कपूर से अपना नाम अनु किया था. भोपाल के इटवारा में जन्मे अनु कपूर आज एक्टिंग के पावरहाउस हैं. उनकी एक्टिंग को दर्शक खूब एन्जॉय कर रहे है. पंजाबी परिवार से ताल्लुक रखने वाले एक्टर के पिता मदनलाल कपूर पारसी थिएटर कंपनी चलाते थे. उनकी मां कमल शबनम बंगाली ब्राह्मण परिवार से थीं. वह उर्दू टीचर और ट्रेंड शास्त्रीय गायिका थीं. उनकी मां की महीने की सैलरी महज 40 रुपये थी. सब कुछ अच्छा चल रहा था कि अचानक रोटी के भी लाले पड़ गए. क्योंकि बदलते दौर के चलते थिएटर बंद होने लगे थे. आर्थिक तंगी के चलते अनु को अपना स्कूल छोड़ना पड़ा. अनु कभी भी एक्टर नहीं बनना चाहते थें. उन्होंने कहा कि उन्होंने गरीबी में चाय, चूरन के नोट और लॉटरी टिकट बेचे थे.

100 से ज्यादा फिल्मों में किया काम
अनु अपने पिता के कहने पर ही थिएटर में शामिल हुए थे. उन्होंने छोटे-छोटे गांवों और शहरों में नाटक किए. वह 250 से ज्यादा पारसी और फोक थिएटर में प्ले कर चुके हैं. 1976 में उन्होंने दिल्ली स्थित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला लिया. एक्टर ने बैरी जॉन के अंतिम यात्रा, एब्राहम अलकाजी के थ्री सिस्टर्स, रंजीत के द ग्रेट गॉड ब्राउन और एक रुका हुआ फैसला जैसे नाटक में प्ले किया था. श्याम बेनेगल भी अनु की एक्टिंग से प्रभावित हुए और उन्होंने फिल्म मंडी में काम का ऑफर दिया. इस फिल्म से उनकी एंट्री बॉलीवुड की मेन स्ट्रीम में हुई. साल 1980 से 1990 के दशक में उन्होंने तेजाब, मिस्टर इंडिया, राम लखन और घायल जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों को हिला डाला था. फिल्म विक्की डोनर में उनके सपोर्टिंग रोल के लिए उन्हें फिल्मफेयर और नेशनल फिल्म अवार्ड मिला. वह अब तक 100 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं.




 

Featured Video Of The Day
Khamenei Killed in US Israel Strike: मस्जिद पर Red Flag फहराकर Iran ने किया Revenge का ऐलान