हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जो सिर्फ फिल्में नहीं बनाते, बल्कि एक पूरी दुनिया रचते हैं. कमाल अमरोही उन्हीं में से एक थे. वो निर्देशक, लेखक और शायर थे, जिनकी फिल्में आलीशान होती थीं. साथ ही उनमें इमोशन्स और नफासत भी नजर आती थी. कमाल अमरोही ने अपने पूरे करियर में गिनी चुनी फिल्में बनाईं. लेकिन हर फिल्म को सालों की मेहनत और लगन से एक यादगार सिनेमा में बदल दिया. पाकीजा भी उनकी ऐसी ही फिल्म में से एक है. जिस के जैसी फिल्म दोबारा गढ़ना अब तक किसी फिल्म मेकर के लिए मुमकिन नहीं हो सका है.
पाकीजा की ग्रैंड पार्टी
पाकीजा के प्रीमियर की ग्रैंड पार्टी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. 4 फरवरी 1972 को मुंबई के मराठा मंदिर थिएटर में ये प्रीमियर किसी जलसे से कम नहीं था. कमाल अमरोही खुद मेहमानों का स्वागत कर रहे थे. थिएटर में प्रवेश लेने के लिए बड़े बड़े सितारे, एक एक करके आते हुए नजर आते हैं. सब कुछ देखकर ऐसा लगता है जैसे सितारे खुद रेड कारपेट की शान बढ़ाने आए हैं. इन सितारों में मीना कुमारी नजर आती हैं. फरीदा जलाल, जॉनी वॉकर जैसे सितारे भी एंट्री लेते हुए दिखते हैं. सबसे ज्यादा ध्यान खींचते हैं कबीर बेदी. जो बेहद यंग, डेशिंग और एनर्जेटिक नजर आ रहे हैं.
कमाल अमरोही की विरासत
कमाल अमरोही ने निर्देशन में कम लेकिन बेहद असरदार काम किया. महाल (1949) ने उन्हें पहचान दिलाई और हिंदी सिनेमा में रहस्य और रोमांच की नई स्टाइल पेश की. दायरा (1953) एक संवेदनशील और शायरी से भरी फिल्म थी. पाकीजा उनका सबसे बड़ा सपना था, जिसे पूरा करने में उन्हें एक दशक से ज्यादा समय लगा. बाद में उन्होंने रजिया सुल्तान (1983) जैसी ऐतिहासिक फिल्म भी बनाई. निर्देशन के अलावा उन्होंने मुगल ए आजम जैसी क्लासिक फिल्म के संवाद लिखे और कहानी में भी काफी कॉन्ट्रिब्यूट किया. पचास साल में उन्होंने सिर्फ चार फिल्में बनाई. जिनमें से तीन ऐसी हैं जो कभी भुलाई नहीं जा सकेंगी. हिंदी सिनेमा के लिए वो किसी अध्याय से कम नहीं हैं.