चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में पहुंचने को भारतीय हॉकी के नए युग का सूत्रपात बताते हुए कप्तान सरदार सिंह ने कहा कि खिलाड़ियों में यह भरोसा फिर पैदा होने लगा है कि हम बड़ी टीमों को हरा सकते हैं।
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नई दिल्ली:
चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में पहुंचने को भारतीय हॉकी के नए युग का सूत्रपात बताते हुए कप्तान सरदार सिंह ने कहा कि खिलाड़ियों में यह भरोसा फिर पैदा होने लगा है कि हम बड़ी टीमों को हरा सकते हैं।
पूल चरण में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड को हराने के बाद बेल्जियम को क्वार्टर फाइनल में मात देकर भारत चैपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में पहुंच गया है, जो टूर्नामेंट में पिछले आठ साल में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारतीय टीम 2004 में इसमें चौथे स्थान पर रही थी।
भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी में एकमात्र पदक 1982 में (कांस्य) जीता था। अपने करियर में पहली बार एफआईएच के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के पुरस्कार की दौड़ में शामिल हुए सरदार ने मेलबर्न से खास बातचीत में कहा, मुझे लगता है कि पिछली नाकामियों को भुलाकर यह भारतीय हॉकी के नए युग की शुरुआत है।
चैंपियंस ट्रॉफी, ओलिंपिक और विश्व कप के बाद सबसे बड़ा टूर्नामेंट है और इसमें अच्छे प्रदर्शन से आत्मविश्वास बढ़ा है। इस स्टार सेंटर हाफ ने कहा, खिलाड़ी एक ईकाई के रूप में खेल रहे हैं। चोटों के बावजूद मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने को बेताब हैं, जो अच्छा संकेत है। नए खिलाड़ी अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं। ओलिंपिक के बाद टीम से बाहर हुए सीनियर खिलाड़ियों को इन नए खिलाड़ियों के साथ लेकर भविष्य के लिए अच्छा पूल तैयार हो सकता है।
पूल चरण में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड को हराने के बाद बेल्जियम को क्वार्टर फाइनल में मात देकर भारत चैपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में पहुंच गया है, जो टूर्नामेंट में पिछले आठ साल में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। भारतीय टीम 2004 में इसमें चौथे स्थान पर रही थी।
भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी में एकमात्र पदक 1982 में (कांस्य) जीता था। अपने करियर में पहली बार एफआईएच के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी के पुरस्कार की दौड़ में शामिल हुए सरदार ने मेलबर्न से खास बातचीत में कहा, मुझे लगता है कि पिछली नाकामियों को भुलाकर यह भारतीय हॉकी के नए युग की शुरुआत है।
चैंपियंस ट्रॉफी, ओलिंपिक और विश्व कप के बाद सबसे बड़ा टूर्नामेंट है और इसमें अच्छे प्रदर्शन से आत्मविश्वास बढ़ा है। इस स्टार सेंटर हाफ ने कहा, खिलाड़ी एक ईकाई के रूप में खेल रहे हैं। चोटों के बावजूद मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने को बेताब हैं, जो अच्छा संकेत है। नए खिलाड़ी अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं। ओलिंपिक के बाद टीम से बाहर हुए सीनियर खिलाड़ियों को इन नए खिलाड़ियों के साथ लेकर भविष्य के लिए अच्छा पूल तैयार हो सकता है।
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