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This Article is From Aug 08, 2012

क्या कांसे से सोने की ओर बढ़ पाएंगी मैरी कॉम?

भारतीय महिला मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम आज ग्रेट ब्रिटेन की निकोला एडम्स के खिलाफ ओलिंपिक खेलों की मुक्केबाजी स्पर्धा के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनने का प्रयास करेंगी।
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लंदन: महिला मुक्केबाज एमसी मैरी कॉम बुधवार को ग्रेट ब्रिटेन की निकोला एडम्स के खिलाफ ओलिंपिक खेलों की मुक्केबाजी स्पर्धा के फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय बनने का प्रयास करेंगी, जिससे सभी की निगाहें इस दिलचस्प मुकाबले पर लगी होगी।

पांच बार की विश्व चैंपियन मैरी कॉम अगर फाइनल में पहुंच जाती हैं, तो वह भारत के लिए इतिहास रच देंगी। उन्होंने भारत के लिए कम से कम कांस्य पदक तो पक्का कर दिया है, जिसका मतलब है कि पदकों की संख्या के लिहाज से देश का यह ओलिंपिक में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन होगा।

भारत ने अभी तक एक रजत और दो कांस्य पदक जीत लिए हैं, जबकि एक कांस्य पदक पक्का है, जो चार साल पहले बीजिंग ओलिंपिक में एक स्वर्ण और दो कांस्य पदक की तुलना में बेहतर है। पदक की दावेदारी में एक अन्य भारतीय मुक्केबाज एल देवेंद्रो सिंह भी शामिल हैं, जो एक्सेल एरीना के पुरुष फ्लाईवेट 49 किग्रा वर्ग में आयरलैंड के पैडी बार्नेस से भिड़ेंगे।

दिलचस्प बात है कि मैरी कॉम और देवेंद्रो दोनों मणिपुर के हैं और एक-दूसरे को बखूबी जानते हैं। अगर दोनों आगे बढ़ते हैं, तो यह राज्य के खेलों के लिए काफी प्रोत्साहित करने वाला होगा। महिला मुक्केबाजी को पहली बार ओलिंपिक में शामिल किया गया है और हमेशा 48 किग्रा वर्ग में भाग लेने वाली मैरी कॉम को ओलिंपिक खेलों की 51 किग्रा स्पर्ध में भाग लेने के लिए वजन बढ़ाना पड़ा।

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