इसे भला किस्मत नहीं तो और क्या कहा जाएगा कि पहला गेम हारने के बाद और दूसरे गेम में पिछड़ने के बावजूद भारत की सर्वोच्च वरीयता प्राप्त खिलाड़ी साइना नेहवाल ने लंदन ओलिंपिक की बैडमिंटन प्रतियोगिता के एकल स्पर्धा का कांस्य पदक अपने नाम कर लिया।
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लंदन:
इसे भला किस्मत नहीं तो और क्या कहा जाएगा कि पहला गेम हारने के बाद और दूसरे गेम में पिछड़ने के बावजूद भारत की सर्वोच्च वरीयता प्राप्त खिलाड़ी साइना नेहवाल ने लंदन ओलिंपिक की बैडमिंटन प्रतियोगिता के एकल स्पर्धा का कांस्य पदक अपने नाम कर लिया। उधर, मुक्केबाज लैशराम देवेंद्रो ने शानदार जीत के साथ क्वार्टर फाइनल में पहुंच गए हैं।
दूसरी ओर, भारत को महिला निशानेबाजी, स्टीपलचेस और नौकायन की युगल स्कल्स स्पर्धा में मायूसी हाथ लगी।
शनिवार को कांस्य पदक के लिए प्लेऑफ मुकाबले में साइना के सामने चीन की वांग जिन थीं। मैच के शुरू में सबकुछ ठीक-ठाक चल रहा था। पहले गेम में जिन, साइना पर हावी दिखीं और चीनी खिलाड़ी ने पहला गेम शानदार ढंग से 21-18 से जीता।
पहले गेम के खत्म होने के कुछ समय पहले जिन का घुटना चोटिल हो गया। इसके बाद उन्होंने कोर्ट से बाहर उपचार लिया और फिर दूसरे गेम में घुटने पर पट्टी बांधकर खेलने के लिए कोर्ट पर उतरीं।
दूसरे गेम में भी जिन 1-0 से आगे थीं लेकिन इसके बाद उनका चोट बढ़ता ही चला गया और अंतत: उन्होंने रिटायर्ड हर्ट होने का फैसला किया।
इस प्रकार साइना को भाग्य के सहारे कांस्य पदक प्राप्त हो गया। विश्व की पांचवीं वरीयता प्राप्त सायना ओलिंपिक की व्यक्तिगत स्पर्धा में पदक जीतने वाली भारत की दूसरी महिला हैं।
लंदन ओलिंपिक में भारत का यह तीसरा पदक है। इससे पहले, निशानेबाज गगन नारंग ने कांस्य और विजय कुमार ने रजत पदक भारत को दिलाया है।
विश्व की पूर्व शीर्ष और वर्तमान की नम्बर दो खिलाड़ी वांग का घुटना स्मैश लगाने के लिए उछलने पर चोटिल हो गया।
उल्लेखनीय है कि साइना अपना सेमीफाइनल मुकाबला शुक्रवार को विश्व की नम्बर एक खिलाड़ी चीन की यिहान वांग से हार गईं थीं।
पदक के प्रबल दावेदारों में से एक मुक्केबाज लैशराम देवेंद्रो सिंह (49 किलोग्राम) ने क्वार्टर फाइनल में जगह बना लिया है। प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में देवेंद्रो ने मंगोलिया के सेरडाम्बा पुरेवडोर्ज को 16-11 से हराया।
देवेंद्र ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अख्तियार किया और उसे मैच के अंत तक जारी रखा। पुरवडोर्ज पूर्व विश्व चैम्पियन हैं। क्वार्टर फाइनल में देवेंद्रो का सामना बुधवार को आयरलैंड के पैडी बार्नंस से होगा।
बरनस 2008 बीजिंग ओलिंपिक के कांस्य पदक विजेता हैं और 2010 राष्ट्रमंडल खेलों के चैम्पियन हैं। उल्लेखनीय है कि देवेंद्रो ने प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में आसानी से प्रवेश किया था।
देवेंद्रो का शुरुआती बाउट होंडूरास के एम.बोरोन से था। बोरोन पर देवेंद्रो इतने हावी हो गए थे कि रेफरी ने विरोधी खिलाड़ी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पहले राउंड में दो मिनट और 24 सेकंड के खेल के बाद ही उसे रोक दिया था और देवेंद्रो को विजेता घोषित कर दिया था।
महिला निशानेबाज शगुन चौधरी ट्रैप स्पर्धा के फाइनल में स्थान बनाने से चूक गईं। क्वालीफाइंग में शगुन 20वें स्थान पर रहीं। शगुन ने पहले राउंड में 20 का स्कोर किया लेकिन अगले दो राउंड में वह क्रमश: 17 और 21 का स्कोर कर सकीं। उन्होंने कुल 61 का स्कोर किया।
इटली की जेसिका रोसी क्वालीफाइंग में शीर्ष पर रहते हुए फाइनल में जगह बनाईं। उन्होंने विश्व रिकॉर्ड के साथ कुल 75 का स्कोर बनाया।
भारत के नाविक संदीप कुमार और मनजीत सिंह पुरुष लाइटवेट युगल स्कल्स स्पर्धा के फाइनल में अंतिम स्थान पर आने से बच गए और वह 19वें स्थान पर रहे। एटॉन डॉर्नी लेक में आयोजित इस स्पर्धा में संदीप और मनजीत ने सात मिनट 8.39 सेकंड समय के साथ 19वें स्थान पर रहे।
संदीप और मनजीत अंतिम पायदान से एक पायदान ऊपर रहे। मिस्र के मोहम्मद नोफेल और ओमर एमिरा 20वें स्थान पर रहे। इस प्रकार लंदन ओलिंपिक में भारत का नौकायन प्रतियोगिता में चुनौती अब समाप्त हो गई है।
एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय धाविका सुधा सिंह 3,000 मीटर स्टीपलचेज प्रतियोगिता के फाइनल में स्थान बनाने से चूक गई।
सुधा हीट1 में 13वें स्थान पर रहीं। उन्होंने नौ मिनट 48.86 सेकंड में रेस पूरी की। जर्मनी की गेसा फेलिसिटास क्रॉस नौ मिनट 24.91 सेकंड के साथ पहले स्थान पर रहीं। उल्लेखनीय है कि सुधा ने वर्ष 2010 में एशियाई खेलों में 3,000 स्टीपलचेज में अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था।
भारत के लिए ट्रैक एंड फील्ड से अच्छी खबर यह है कि राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता चक्का फेंक महिला एथलीट कृष्णा पूनिया फाइनल के लिए क्वालीफाई कर चुकी हैं।
दूसरी ओर, भारत को महिला निशानेबाजी, स्टीपलचेस और नौकायन की युगल स्कल्स स्पर्धा में मायूसी हाथ लगी।
शनिवार को कांस्य पदक के लिए प्लेऑफ मुकाबले में साइना के सामने चीन की वांग जिन थीं। मैच के शुरू में सबकुछ ठीक-ठाक चल रहा था। पहले गेम में जिन, साइना पर हावी दिखीं और चीनी खिलाड़ी ने पहला गेम शानदार ढंग से 21-18 से जीता।
पहले गेम के खत्म होने के कुछ समय पहले जिन का घुटना चोटिल हो गया। इसके बाद उन्होंने कोर्ट से बाहर उपचार लिया और फिर दूसरे गेम में घुटने पर पट्टी बांधकर खेलने के लिए कोर्ट पर उतरीं।
दूसरे गेम में भी जिन 1-0 से आगे थीं लेकिन इसके बाद उनका चोट बढ़ता ही चला गया और अंतत: उन्होंने रिटायर्ड हर्ट होने का फैसला किया।
इस प्रकार साइना को भाग्य के सहारे कांस्य पदक प्राप्त हो गया। विश्व की पांचवीं वरीयता प्राप्त सायना ओलिंपिक की व्यक्तिगत स्पर्धा में पदक जीतने वाली भारत की दूसरी महिला हैं।
लंदन ओलिंपिक में भारत का यह तीसरा पदक है। इससे पहले, निशानेबाज गगन नारंग ने कांस्य और विजय कुमार ने रजत पदक भारत को दिलाया है।
विश्व की पूर्व शीर्ष और वर्तमान की नम्बर दो खिलाड़ी वांग का घुटना स्मैश लगाने के लिए उछलने पर चोटिल हो गया।
उल्लेखनीय है कि साइना अपना सेमीफाइनल मुकाबला शुक्रवार को विश्व की नम्बर एक खिलाड़ी चीन की यिहान वांग से हार गईं थीं।
पदक के प्रबल दावेदारों में से एक मुक्केबाज लैशराम देवेंद्रो सिंह (49 किलोग्राम) ने क्वार्टर फाइनल में जगह बना लिया है। प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में देवेंद्रो ने मंगोलिया के सेरडाम्बा पुरेवडोर्ज को 16-11 से हराया।
देवेंद्र ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अख्तियार किया और उसे मैच के अंत तक जारी रखा। पुरवडोर्ज पूर्व विश्व चैम्पियन हैं। क्वार्टर फाइनल में देवेंद्रो का सामना बुधवार को आयरलैंड के पैडी बार्नंस से होगा।
बरनस 2008 बीजिंग ओलिंपिक के कांस्य पदक विजेता हैं और 2010 राष्ट्रमंडल खेलों के चैम्पियन हैं। उल्लेखनीय है कि देवेंद्रो ने प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में आसानी से प्रवेश किया था।
देवेंद्रो का शुरुआती बाउट होंडूरास के एम.बोरोन से था। बोरोन पर देवेंद्रो इतने हावी हो गए थे कि रेफरी ने विरोधी खिलाड़ी की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पहले राउंड में दो मिनट और 24 सेकंड के खेल के बाद ही उसे रोक दिया था और देवेंद्रो को विजेता घोषित कर दिया था।
महिला निशानेबाज शगुन चौधरी ट्रैप स्पर्धा के फाइनल में स्थान बनाने से चूक गईं। क्वालीफाइंग में शगुन 20वें स्थान पर रहीं। शगुन ने पहले राउंड में 20 का स्कोर किया लेकिन अगले दो राउंड में वह क्रमश: 17 और 21 का स्कोर कर सकीं। उन्होंने कुल 61 का स्कोर किया।
इटली की जेसिका रोसी क्वालीफाइंग में शीर्ष पर रहते हुए फाइनल में जगह बनाईं। उन्होंने विश्व रिकॉर्ड के साथ कुल 75 का स्कोर बनाया।
भारत के नाविक संदीप कुमार और मनजीत सिंह पुरुष लाइटवेट युगल स्कल्स स्पर्धा के फाइनल में अंतिम स्थान पर आने से बच गए और वह 19वें स्थान पर रहे। एटॉन डॉर्नी लेक में आयोजित इस स्पर्धा में संदीप और मनजीत ने सात मिनट 8.39 सेकंड समय के साथ 19वें स्थान पर रहे।
संदीप और मनजीत अंतिम पायदान से एक पायदान ऊपर रहे। मिस्र के मोहम्मद नोफेल और ओमर एमिरा 20वें स्थान पर रहे। इस प्रकार लंदन ओलिंपिक में भारत का नौकायन प्रतियोगिता में चुनौती अब समाप्त हो गई है।
एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय धाविका सुधा सिंह 3,000 मीटर स्टीपलचेज प्रतियोगिता के फाइनल में स्थान बनाने से चूक गई।
सुधा हीट1 में 13वें स्थान पर रहीं। उन्होंने नौ मिनट 48.86 सेकंड में रेस पूरी की। जर्मनी की गेसा फेलिसिटास क्रॉस नौ मिनट 24.91 सेकंड के साथ पहले स्थान पर रहीं। उल्लेखनीय है कि सुधा ने वर्ष 2010 में एशियाई खेलों में 3,000 स्टीपलचेज में अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था।
भारत के लिए ट्रैक एंड फील्ड से अच्छी खबर यह है कि राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता चक्का फेंक महिला एथलीट कृष्णा पूनिया फाइनल के लिए क्वालीफाई कर चुकी हैं।
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