ओलिंपिक कांस्य पदक विजेता साइना नेहवाल और युवा सितारे के श्रीकांत ने रविवार को फुजोउ में 700,000 डॉलर इनामी चाइना ओपन सुपर सीरीज बैडमिंटन टूर्नामेंट में क्रमश: महिला और पुरुष एकल का खिताब जीतकर भारतीय बैडमिंटन में नया इतिहास रचा।
छठी बार इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में भाग लेने वाली विश्व में पांचवें नंबर की साइना ने हैक्सिया ओलिंपिक स्पोर्ट सेंटर में महिला एकल के फाइनल में जापान की 17 वर्षीय अकेनी यामागुची को 42 मिनट तक चले मुकाबले में 21-12, 22-20 से हराकर अपना आठवां प्रीमियर सुपर खिताब जीता। श्रीकांत ने बड़ा उलटफेर किया। उन्होंने दो बार के ओलिंपिक स्वर्ण पदक विजेता और पांच बार के विश्व चैंपियन चीनी खिलाड़ी लिन डैन के खिलाफ दबदबे वाला प्रदर्शन करके 21-19, 21-17 से जीत दर्ज की। पुरुष एकल का यह फाइनल मैच 46 मिनट तक चला। श्रीकांत का यह पहला सुपर सीरीज खिताब है।
यह पहला अवसर है जबकि भारतीय खिलाड़ियों ने किसी सुपर सीरीज टूर्नामेंट में पुरुष और महिला एकल दोनों वर्गों में जीत दर्ज की। सुपर सीरीज और प्रीमियर टूर्नामेंट शुरू किए जाने के बाद यह पहला मौका है जबकि किसी भारतीय पुरुष शटलर ने सुपर सीरीज प्रीमियर का खिताब जीता। श्रीकांत ने कड़े मुकाबले में शुरू में 11-7 से बढ़त बना रखी थी लेकिन लिन ने वापसी की और यह अंतर 11-10 कर दिया। इस 31 वर्षीय स्टार चीनी खिलाड़ी ने अपने शाट में शानदार नियंत्रण दिखाया लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने नेट पर अच्छा खेल दिखाया। उनके ड्रिबल और शक्तिशाली स्मैश का लिन के पास जवाब नहीं था जिससे श्रीकांत 14-12 से आगे हो गए।
दूसरा गेम भी इसी अंदाज में शुरू हुआ। दोनों शटलर ने अपनी तरफ से सर्वश्रेष्ठ प्रयास किए। वे दोनों लगभग साथ साथ आगे बढ़ते हुए 8-8 के स्कोर पर पहुंचे लेकिन इंटरवल तक लिन 11-9 से आगे थे।
श्रीकांत ने हालांकि जल्द ही स्कोर 12-12 से बराबर कर दिया। इसके बाद 15-15 के स्कोर तक भी दोनों बराबरी पर आगे बढ़ रहे थे। आंध्र प्रदेश के 21 वर्षीय खिलाड़ी ने यहां से मामूली बढ़त हासिल की और फिर जल्द ही चार अंक की बढ़त पर पहुंच गए। लिन ने एक मैच प्वाइंट बचाया, लेकिन श्रीकांत ने अगले पर अंक बनाकर भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में अपना नाम स्वर्णाक्षरों में लिखवा दिया।
पिछले साल थाईलैंड ओपन ग्रां प्री जीतने वाले श्रीकांत इस साल इंडिया ओपन ग्रां प्री में उप विजेता रहे थे जबकि वह मलेशियाई ओपन के क्वार्टर फाइनल में पहुंचे थे। वह ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों के मिश्रित टीम वर्ग के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली भारतीय टीम का हिस्सा भी थे। वह साइना थीं जिन्होंने भारतीयों को दिन में खुशी का पहला मौका दिया।
उन्होंने अपने छठे प्रयास में पहली बार चाइना ओपन का खिताब जीता। पहले गेम में साइना ने शुरू में ही 3-1 की बढ़त बना ली और इसे वह 8-4 तक ले गयी। उन्होंने गलत स्ट्रोक्स के कारण कुछ अंक गंवाये, लेकिन इंटरवल तक भारतीय खिलाड़ी चार अंक की बढ़त पर थीं।
इसके बाद साइना ने शटल पर नियंत्रण बनाए रखा और अपनी युवा प्रतिद्वंद्वी को गलतियां करने के लिए मजबूर किया जिससे वह 14-7 की मजबूत बढ़त हासिल करने में सफल रहीं।
अकेनी ने दूसरे गेम में अच्छा प्रदर्शन किया। 17 वर्षीय खिलाड़ी ने काफी तेजी दिखाई और कोर्ट को अच्छी तरह से कवर किया। उन्होंने साइना को अपनी सीधे स्मैश से हैरान किया और ब्रेक तक 11-9 की मामूली बढ़त हासिल कर ली। दूसरे गेम में आखिरी क्षण काफी तनावपूर्ण लेकिन रोमांचक रहे।
दोनों ही खिलाड़ी लंबी रैलियों में उलझी रहीं, लेकिन अनुभवी साइना ने वापसी करके स्कोर 14-14 से बराबर कर दिया। साइना ने अच्छे स्ट्रोक्स लगाए लेकिन वह जापानी खिलाड़ी में कोई कमजोरी नहीं ढूंढ़ पाईं जिन्होंने भारतीय खिलाड़ी के हर शाट का करारा जवाब दिया।
जब स्कोर 18-18 से बराबरी पर था तब साइना ने नेट शाट के कारण एक अंक हासिल किया लेकिन भारतीय खिलाड़ी का शाट इसके बाद बाहर चला गया और अगली बार वह चूक गईं। इससे अकेनी 20-19 से आगे होकर मैच प्वाइंट पर पहुंच गईं।
साइना हालांकि इसी गेम में मैच समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध थीं और जापानी खिलाड़ी ने भी दो शाट बाहर लगाकर उनका काम आसान कर दिया। यह साइना का साल का तीसरा खिताब है। उन्होंने जून में ऑस्ट्रेलियन सुपर सीरीज और इस साल के शुरू में सैयद मोदी अंतरराष्ट्रीय ग्रां प्री गोल्ड का खिताब जीता था। यह उनका कुल आठवां प्रीमियर सुपर सीरीज खिताब है।
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