पी गोपीचंद और पीवी सिंधु का फाइल फोटो
रियो डि जिनेरियो:
रियो में भारतीय बैडमिंटन के सुपर कोच पुलेला गोपीचंद का एक अलग रुतबा कायम हो गया है. गोपीचंद के एक एथलीट के श्रीकांत ने बैडमिंटन के सुपर स्टार चीन के लिन डान को कड़ी टक्कर दी तो उनकी दूसरी एथलीट पीवी सिंधु ने वो कर दिखाया जो अब तक भारतीय बैडमिंटन के इतिहास में किसी ने नहीं किया था.
सिंधु के फाइनल में पहुंचने के बाद बताया जाता है कि चीनी कोच एक तरह से गोपीचंद की दहशत में हैं तो दुनिया भर के दूसरे जानकार उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं. गोपीचंद बेहद विनम्रतापूर्वक कहते हैं कि यदि ऐसा कुछ है तो यह उनके लिए फख्र की बात है.
गोपी बताते हैं कि इस बार उनकी प्लानिंग लंदन से ज्यादा सरल है. वो ये भी कहते हैं कि वो बहुत गहरी रणनीति नहीं बना रहे हैं. दरअसल उन्होंने अपनी तैयारी यहां आने से पहले पूरी कर ली थी. इससे पहले लंदन ओलिंपिक के दौरान पुलेला ने सघन योजना बनाई थी और खिलाडि़यों के मैच के प्रदर्शन का भार उन पर रहता था लेकिन इस बार उन्होंने अपनी योजना का सरलीकरण किया है.
वो हर दिन की दिनचर्या के बारे में कहते हैं कि खिलाड़ी सुबह साढ़े छह बजे और शाम को साढ़े तीन बजे जिम जाते हैं और या फिर स्वीमिंग पूल में अपना सेशन पूरा करते हैं. सुबह 10 से एक के बीच खिलाडि़यों को अभ्यास करने का मौका मिलता है. दिन का नाश्ता आठ बजे, दोपहर का खाना दिन के दो बजे से पहले और डिनर रात आठ बजे से पहले कर लिया जाता है. खिलाडि़यों को फिर भी भूख लगे तो रात को 10 बजे से पहले एक सैंडविच खाने की इजाजत होती है. खिलाडि़यों को आठ घंटे रात में और दोपहर में करीब दो घंटा सोना जरूरी होता है.
गोपी विनम्र कोच के रूप में जाने जाते हैं लेकिन अनुशासन का सख्ती से पालन करवाते हैं. ये अनुशासन उनके कैंप के दौरान भी कायम रहता है इसलिए उनके खिलाड़ी बड़े और दबाव वाले मैच में भी अपनी काबिलियत के अनुरूप प्रदर्शन करने का माद्दा रखते हैं.
सिंधु के फाइनल में पहुंचने के बाद बताया जाता है कि चीनी कोच एक तरह से गोपीचंद की दहशत में हैं तो दुनिया भर के दूसरे जानकार उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं. गोपीचंद बेहद विनम्रतापूर्वक कहते हैं कि यदि ऐसा कुछ है तो यह उनके लिए फख्र की बात है.
गोपी बताते हैं कि इस बार उनकी प्लानिंग लंदन से ज्यादा सरल है. वो ये भी कहते हैं कि वो बहुत गहरी रणनीति नहीं बना रहे हैं. दरअसल उन्होंने अपनी तैयारी यहां आने से पहले पूरी कर ली थी. इससे पहले लंदन ओलिंपिक के दौरान पुलेला ने सघन योजना बनाई थी और खिलाडि़यों के मैच के प्रदर्शन का भार उन पर रहता था लेकिन इस बार उन्होंने अपनी योजना का सरलीकरण किया है.
वो हर दिन की दिनचर्या के बारे में कहते हैं कि खिलाड़ी सुबह साढ़े छह बजे और शाम को साढ़े तीन बजे जिम जाते हैं और या फिर स्वीमिंग पूल में अपना सेशन पूरा करते हैं. सुबह 10 से एक के बीच खिलाडि़यों को अभ्यास करने का मौका मिलता है. दिन का नाश्ता आठ बजे, दोपहर का खाना दिन के दो बजे से पहले और डिनर रात आठ बजे से पहले कर लिया जाता है. खिलाडि़यों को फिर भी भूख लगे तो रात को 10 बजे से पहले एक सैंडविच खाने की इजाजत होती है. खिलाडि़यों को आठ घंटे रात में और दोपहर में करीब दो घंटा सोना जरूरी होता है.
गोपी विनम्र कोच के रूप में जाने जाते हैं लेकिन अनुशासन का सख्ती से पालन करवाते हैं. ये अनुशासन उनके कैंप के दौरान भी कायम रहता है इसलिए उनके खिलाड़ी बड़े और दबाव वाले मैच में भी अपनी काबिलियत के अनुरूप प्रदर्शन करने का माद्दा रखते हैं.
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