लोढ़ा समिति ने बोर्ड में भागीदारी के नए स्पष्टीकरण जारी किए हैं
- नए नियमों के मुताबिक अयोग्य व्यक्ति बोर्ड का प्रतिनिधि नहीं हो सकता
- BCCI से बर्खास्त अजय शिर्के MCB का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकते
- कैब के अध्यक्ष सौरभ गांगुली को लेना होगा 3 साल का अनिवार्य अवकाश
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नई दिल्ली:
लोढ़ा समिति के नए नियम क्रिकेट संघों में बैठे लोगों पर भारी पड़ने लगे हैं. समिति के पहले शिकार बने थे बीसीसीआई के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर. अब कई और पदाधिकारियों पर नए नियमों की गाज गिरने वाली है. इनमें दादा के नाम से मशहूर सौरभ गांगुली भी शामिल हैं.
समिति के सचिव गोपाल शंकरनारायन ने गुरुवार को बीसीसीआई और राज्य संघों के सदस्यों में प्रतिनिधियों की भागीदारी से जुड़े नए स्पष्टीकरण जारी किए.
लोढ़ा समिति ने प्रशासनिक सुधारों को लेकर पूछे गए सवालों पर सात बिंदू बोर्ड के लिए अनिवार्य बनाते हुए स्पष्ट किया कि बीसीसीआई के बर्खास्त सचिव अजय शिर्के बीसीसीआई की बैठकों में महाराष्ट्र क्रिकेट संघ के प्रतिनिधि नहीं हो सकते.
बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) के अध्यक्ष सौरव गांगुली बारे में समिति का कहना है कि जून 2017 के बाद उन्हें तीन साल के अनिवार्य ब्रेक से गुजरना होगा, क्योंकि राज्य संघ में सचिव और अध्यक्ष के रूप में उनके तीन साल पूरे हो जाएंगे.
कैब के कोषाध्यक्ष विश्वरूप डे का प्रशासनिक करियर भी खत्म हो गया है क्योंकि वह सहायक सचिव के जिस पद पर दो साल के लिए रहे थे उसे पदाधिकारी का पद माना गया है जिससे राज्य संघ में उनका संचित कार्यकाल 10 साल का हो जाता है.
लोढ़ा समिति से जो सवाल सबसे अधिक बार पूछा गया वह शिर्के के प्रवेश से संबंधित था. समिति से सवाल किया गया कि क्या कोई अयोग्य किया गया पदाधिकारी सदस्य संघ या बीसीसीआई के प्रतिनिधि या नामित के रूप में काम कर सकता है, क्या ऐसा व्यक्ति संघ या बीसीसीआई की ओर से कोई अन्य भूमिका निभा सकता है..?
इस पर समिति ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश को देखते हुए कोई भी अयोग्य पदाधिकारी क्रिकेट प्रशासन से नहीं जुड़ सकता. वह सदस्य संघ या बीसीसीआई का प्रतिनिधि या नामित होने से भी डिस्क्वालीफाई है और संघ या बीसीसीआई की ओर से कोई अन्य भूमिका नहीं निभा सकता. वह संघ के साथ संरक्षक या सलाहकार की भूमिका भी नहीं निभा सकता और किसी समिति या परिषद का सदस्य नहीं बन सकता.
समिति के सचिव गोपाल शंकरनारायन ने गुरुवार को बीसीसीआई और राज्य संघों के सदस्यों में प्रतिनिधियों की भागीदारी से जुड़े नए स्पष्टीकरण जारी किए.
लोढ़ा समिति ने प्रशासनिक सुधारों को लेकर पूछे गए सवालों पर सात बिंदू बोर्ड के लिए अनिवार्य बनाते हुए स्पष्ट किया कि बीसीसीआई के बर्खास्त सचिव अजय शिर्के बीसीसीआई की बैठकों में महाराष्ट्र क्रिकेट संघ के प्रतिनिधि नहीं हो सकते.
बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) के अध्यक्ष सौरव गांगुली बारे में समिति का कहना है कि जून 2017 के बाद उन्हें तीन साल के अनिवार्य ब्रेक से गुजरना होगा, क्योंकि राज्य संघ में सचिव और अध्यक्ष के रूप में उनके तीन साल पूरे हो जाएंगे.
कैब के कोषाध्यक्ष विश्वरूप डे का प्रशासनिक करियर भी खत्म हो गया है क्योंकि वह सहायक सचिव के जिस पद पर दो साल के लिए रहे थे उसे पदाधिकारी का पद माना गया है जिससे राज्य संघ में उनका संचित कार्यकाल 10 साल का हो जाता है.
लोढ़ा समिति से जो सवाल सबसे अधिक बार पूछा गया वह शिर्के के प्रवेश से संबंधित था. समिति से सवाल किया गया कि क्या कोई अयोग्य किया गया पदाधिकारी सदस्य संघ या बीसीसीआई के प्रतिनिधि या नामित के रूप में काम कर सकता है, क्या ऐसा व्यक्ति संघ या बीसीसीआई की ओर से कोई अन्य भूमिका निभा सकता है..?
इस पर समिति ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश को देखते हुए कोई भी अयोग्य पदाधिकारी क्रिकेट प्रशासन से नहीं जुड़ सकता. वह सदस्य संघ या बीसीसीआई का प्रतिनिधि या नामित होने से भी डिस्क्वालीफाई है और संघ या बीसीसीआई की ओर से कोई अन्य भूमिका नहीं निभा सकता. वह संघ के साथ संरक्षक या सलाहकार की भूमिका भी नहीं निभा सकता और किसी समिति या परिषद का सदस्य नहीं बन सकता.
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