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This Article is From Jul 19, 2016

टेनिस कोर्ट के भीतर और बाहर किए संघर्ष की कहानी है सानिया मिर्ज़ा की आत्मकथा 'एस अगेन्स्ट ऑड्स'

टेनिस कोर्ट के भीतर और बाहर किए संघर्ष की कहानी है सानिया मिर्ज़ा की आत्मकथा 'एस अगेन्स्ट ऑड्स'
नई दिल्ली: आज टेनिस के शिखर पर पहुंच चुकीं भारतीय टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा ने अपनी आत्मकथा 'एस अगेन्स्ट ऑड्स' में टेनिस कोर्ट के भीतर और बाहर अपने संघर्षों को बयान किया है, और बताया है कि उनकी ज़िन्दगी में किस तरह उतार-चढ़ाव आए, और उन्होंने उनसे कैसे पार पाया।

29 साल की उम्र में छह ग्रैंडस्लैम खिताब (तीन महिला युगल, तीन मिश्रित युगल) जीत चुकीं सानिया ने 16 साल की उम्र में ही विम्बल्डन जूनियर युगल खिताब जीता था, और स्टार बन गई थीं। अब पिछले दिनों में सानिया ने अपनी युगल जोड़ीदार मार्टिना हिंगिस के साथ लगातार 41 मैच जीते, और युगल टेनिस की रैंकिंग में अव्वल पायदान तक पहुंचीं। इस पूरे सफर के दौरान आई कठिनाइयों को सानिया ने इस आत्मकथा 'एस अगेन्स्ट ऑड्स' में कलमबद्ध किया है।

पिता इमरान मिर्जा की मदद से लिखी सानिया मिर्ज़ा की इस आत्मकथा की प्रस्तावना मार्टिना हिंगिस ने लिखी है, जिन्होंने सानिया को 'खतरनाक फोरहैंड वाली बेहतरीन खिलाड़ी' बताया है। भारत के एक और टेनिस स्टार और मिश्रित युगल में उनके जोड़ीदार रहे महेश भूपति ने पुस्तक का प्राक्कथन लिखा है, जिनका मानना है कि भारतीय खेलों का चेहरा बदलने में सानिया का अहम योगदान है।

किताब में बताया गया है कि कैसे सानिया की निजी ज़िन्दगी हमेशा चर्चा में रही, चाहे वह उनके खिलाफ फतवा जारी होने के बारे में हो, उनके ऑपरेशन से जुड़ी बात हो, उनकी पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक से शादी की बात हो, या शादी से पहले सेक्स को लेकर उनकी टिप्पणी का मामला हो।

सानिया मिर्ज़ा ने लिखा, "विम्बल्डन में मेरी टीशर्ट पर चर्चा हुई तो अमेरिकी ओपन में नथ पर... मैं जो कुछ भी पहनती, उसे बगावत का प्रतीक मान लिया जाता... शायद विदेशी मीडिया ने एक युवा भारतीय लड़की को पहले इस मुकाम पर नहीं देखा था या मैं एक पारंपरिक भारतीय लड़की के अमेरिकियों के मानदंड पर खरी नहीं उतरती थी..."

सानिया मिर्ज़ा ने लिखा, "मेरी नथ (नोज़ रिंग) जल्द ही भारत में काफी लोकप्रिय हो गई और बाजार में 'सानिया नोज़ रिंग' के नाम से बिकने लगी... युवा लड़कियों में इसका काफी क्रेज़ था..." सानिया ने वह किस्सा भी बयान किया, जब उनकी बचपन की एक दोस्त विम्बल्डन में रोजर फेडरर या येलेना यांकोविच से बात करने के बावजूद उन्हें पहचान नहीं सकी, चूंकि उसकी टेनिस में कोई रुचि नहीं थी।

सानिया मिर्ज़ा ने आत्मकथा में बताया कि कैसे उन्होंने सेरेना विलियम्स या मारिया शारापोवा का कोर्ट पर सामना किया और अपनी आदर्श स्टेफी ग्राफ के सामने उनकी बोलती बंद हो गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि खेल में भारत का रिकॉर्ड बेहतर करना उनका सपना है। उन्होंने कहा, "यह निराशाजनक नहीं है कि लिएंडर (पेस), महेश (भूपति) और मेरे अलावा किसी ने टेनिस के इतिहास में भारत के लिए ग्रैंडस्लैम नहीं जीता..."

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