मध्यपूर्व एशिया में संकट के कारण भारत समेत कई देशों में बिटुमेन की कमी और कीमतों में तेज वृद्धि हुई है. बिटुमेन और दूसरे महत्वपूर्ण मेटेरियल का 85% हिस्सा मध्य पूर्व से आता है, जो युद्ध के कारण बाधित हो गया. भारत सरकार ने संकट के समाधान के लिए वैकल्पिक स्रोतों की खोज शुरू कर दी है ताकि सप्लाई बाधित न हो.