नीरज ने शोहरत हिन्दी के साथ उर्दू शायरी के मंचों पर भी हासिल की नीरज कविता का एक पूरा युग थे, लोगों ने आधी सदी से भी ज्यादा उन्हें सुना नीरज के निधन से काव्य जगत को हुए नुकसान की भरपाई हो ही नहीं सकती