चैतन्यानंद ने पिछले लगभग बीस वर्षों में सफेद और लाल रंग के कपड़े पहनकर विभिन्न वेश में अपराध किया है. उन्होंने रामकृष्ण मिशन में शामिल होकर अपना नाम पार्थसारथी रुद्र से बदलकर बीआर पार्थसारथी रखा था. चैतन्यानंद ने खुद को टिहरी के ओंकारानंद इंस्टीट्यूट में लेक्चरर और एआईसीटीई सदस्य बताकर फर्जीवाड़ा किया था.