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This Article is From Sep 12, 2014

उच्च न्यायालय ने पिंकी को बलात्कार के आरोपों से बरी किया

एथलीट पिंकी प्रमाणिक की फाइल तस्वीर
एथलीट पिंकी प्रमाणिक की फाइल तस्वीर
कोलकाता:

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता पिंकी प्रमाणिक को बलात्कार और धोखाधड़ी के आरोपों से बरी कर दिया। उन पर यह आरोप उस महिला ने लगाए थे जो उनकी 'लिव इन पार्टनर' थी।

न्यायमूर्ति सुब्रत तालुकदार ने पिंकी के खिलाफ बलात्कार और धोखाधड़ी के आरोपों को खारिज कर दिया। पिंकी पर जून 2012 में एक महिला ने आरोप लगाया था कि उन्होंने शादी का वादा करने और शारीरिक संबंध बनाने के बावजूद उससे शादी नहीं की।

महिला की शिकायत पर इस खिलाड़ी के खिलाफ बारासात अदालत सत्र न्यायाधीश ने आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) और 418 (धोखाधड़ी) के तहत आरोप तय किए थे।

इसे चुनौती देते हुए पिंकी 2013 में उच्च न्यायालय की शरण में गई थी और अपने खिलाफ आरोपों को खारिज करने को कहा था।

पिंकी के वकील कौशिक गुप्ता ने न्यायमूर्ति तालुकदार के समक्ष कहा था कि उनके चिकित्सीय परीक्षण में साबित हुआ है कि वह महिला हैं।

गुप्ता ने कहा कि भारतीय कानून के तहत पुरूष पर ही बलात्कार का आरोप लगाया जा सकता है और ऐसी स्थिति में पिंकी के खिलाफ बलात्कार और धोखाधड़ी का मामला निरस्त होना चाहिए।

अभियोजन पक्ष ने पिंकी की इस याचिका का विरोध किया था।

न्यायमूर्ति तालुकदार ने हालांकि दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद पिंकी के खिलाफ मामले को निरस्त कर दिया।

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एथलीट पिंकी प्रामाणिक, रेप और धोखाधड़ी का आरोप, Athelete Pinki Pramanik, Rape And Cheat Case
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