भारतीय कॉमिक्स का स्वर्ण युग 80 और 90 के दशक में था जब नागराज, चाचा चौधरी जैसे देसी सुपरहीरो लोकप्रिय थे चंदामामा और चंपक जैसी बाल पत्रिकाओं ने लोककथाओं और संस्कारों के माध्यम से बच्चों को महत्वपूर्ण सीख दी थी 2000 के बाद वितरण नेटवर्क टूटने और डिजिटल मीडिया के आने से भारतीय कॉमिक्स इंडस्ट्री का पतन शुरू हुआ