संघ ने शताब्दी वर्ष की तैयारी में दिल्ली विज्ञान भवन में तीन दिवसीय व्याख्यान माला का आयोजन किया भागवत ने हिंदू को जातीय या धार्मिक नहीं सांस्कृतिक और समावेशी जीवन दृष्टि के रूप में परिभाषित किया संघ में स्वयंसेवकों को पद या पैसा नहीं, बल्कि सेवा का अवसर मिलता है, 4 गुणों को सामाजिक व्यवहार आधार बताया गया