मोहन भागवत ने कहा कि भारत की विविधता में सभी को नियम पालन करते हुए संयम और सद्भाव बनाए रखना चाहिए उन्होंने कहा कि छोटी बातों पर कानून हाथ में लेकर हिंसा करना और समुदायों को उकसाना गलत और योजनाबद्ध होता है भागवत ने भारतीय संस्कृति को राष्ट्रीयता का मूल आधार बताया और इसे हिंदू राष्ट्रीयता के रूप में परिभाषित किया