इन 40 दिनों के दौरान सबसे दिलचस्प तस्वीर सामने आई वो यह कतई नहीं थी कि कौन किसके साथ खड़ा है. बल्कि असली कहानी तो यह है कि कौन इससे सबसे अधिक राहत महसूस कर रहा है. कोई खुल कर 'थैंक्यू' नहीं बोल रहा है. पर साइलेंट थैंक्यू बोलने वालों में एशियाई, यूरोपीय, सहयोगी, विरोधी सभी तरह के देश शामिल हैं.