सेरोगेसी एक चुनौतीपूर्ण अनुभव है, जिसमें मां 9 महीने बच्चे को पेट में रखकर जन्म के बाद उसे सौंप देती है. भारत में 2021 के सरोगेसी विनियमन अधिनियम के तहत कमर्शियल सेरोगेसी पूरी तरह बैन है. सेरोगेट माताओं की मानसिक और शारीरिक देखभाल के साथ भावनात्मक समर्थन भी जरूरी होता है.