केदारनाथ के पैदल मार्ग पर लगभग चार से पांच किलोमीटर क्षेत्र में हिमस्खलन का खतरा सबसे अधिक सक्रिय रहता है. वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया कि रोपवे परियोजना को प्राथमिकता देकर पुराने पैदल मार्ग को पुनः शुरू किया जाना चाहिए. हर मिनट लगभग एक सौ से दो सौ तीर्थ यात्री हिमस्खलन प्रभावित क्षेत्र से गुजरते हैं.