इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि वैवाहिक कलह के कारण हुई आत्महत्या को उकसावा नहीं माना जाएगा कोर्ट ने परिवारिक झगड़ों में "मुझे मर जाना चाहिए" जैसे क्षणिक आवेश वाले शब्दों को उकसावे के रूप में नहीं माना कोर्ट ने पाया कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं होता कि मृतक के पास आत्महत्या के अलावा कोई विकल्प बचा था