डालडा ब्रांड की शुरुआत 1930 के दशक में लीवर ब्रदर्स द्वारा की गई थी, जो वनस्पति तेल का व्यवसाय था डालडा ने 1950 से 1980 के बीच भारतीय वनस्पति घी बाजार का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त किया था डालडा हाइड्रोजनीकरण प्रक्रिया से बना वनस्पति तेल था, जो सस्ता और लंबे समय तक खराब न होने वाला था