सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद HC के एक जज को वरिष्ठ जज के साथ बैठाने और आपराधिक मामले न देने का आदेश दिया था. 4 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने हाईकोर्ट के जज के आदेश को रद्द करते हुए कठोर टिप्पणी की थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उक्त जज ने न्याय का मखौल उड़ाया और उनकी योग्यता पर भी सवाल उठाए थे.