संत प्रेमानंद महाराज पिछले उन्नीस वर्षों से दोनों किडनियों के खराब होने के बावजूद भक्ति करते आ रहे हैं. जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद महाराज को चमत्कार नहीं माना और उन्हें एक बालक के समान बताया है. रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद महाराज को संस्कृत बोलने या श्लोकों का अर्थ समझाने की चुनौती दी है