भारत में इच्छामृत्यु पर बहस तेज हुई है, जहां कोर्ट ने हाल ही में मानवीय आधार पर अनुमति दी है. अरुणा शानबाग केस में सुप्रीम कोर्ट ने निष्क्रिय इच्छा मृत्यु को शर्तों के साथ मान्यता दी लेकिन अनुमति नहीं दी. हरीश राणा के मामले में परिवार ने इच्छा मृत्यु की अनुमति कोर्ट से मांगी, जो फैसले में अहम रही.