1960-70 में नक्सलबाड़ी आंदोलन और स्थानीय राजनीतिक अस्थिरता के दौर में वैचारिक वर्चस्व के लिए हिंसा हुई थी. 1977-2011 के बीच वामपंथी शासन के दौरान हिंसा को कैडर का रूप मिला. सिंगूर और नंदीग्राम जैसे हिंसक संघर्ष हुए. 2011 से 2026 तक तृणमूल कांग्रेस का दौर में भी चुनावी के बाद का हिंसा का पुराना पैटर्न जारी रहा.