SC ने स्पष्ट किया कि किसी भी समुदाय को भाषण, फिल्म या अन्य माध्यम से बदनाम करना संविधान का उल्लंघन है. जस्टिस उज्जल भुइयां ने संवैधानिक मूल्यों और भाईचारे के महत्व पर विस्तार से विचार प्रस्तुत किए. कोर्ट ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को केवल आपत्ति के कारण प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है.