बालासाहेब ठाकरे ने कभी कहा था, “मेरे बाद शिवसेना का क्या होगा, यह समय तय करेगा.” बीते दशक के राजनीतिक बदलावों और गठबंधन राजनीति के बीच विभाजित हो चुकी पार्टी का प्रभुत्व कम हो चला है. ठाकरे ब्रांड फीका पड़ रहा, अब 2029 के चुनाव बताएंगे कि बालासाहेब की विरासत को जनता कैसे देखना चाहती है.