दिल्ली पुलिस का एक सिपाही अरुण और उसका साथी तुषार नकली पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट बनाने का रैकेट चलाते थे. आरोपियों ने किराए के मकान में फर्जी दस्तावेज, पुलिस मुहरें और पीसीसी फॉर्म रखकर कई महीनों से फर्जीवाड़ा किया. फर्जी पीसीसी बनाने के लिए आरोपी लोगों से हजार से 2 हजार रुपये तक वसूलते थे जबकि असली में 10 रुपये लगते हैं.