रामदास कदम ने दावा किया कि बालासाहेब ठाकरे की पार्थिव देह दो दिन मातोश्री में रखी गई और हाथों के निशान लिए गए. कदम ने सवाल उठाया कि बालासाहेब की वसीयत किसने लिखी? यह कब लिखी गई और इस पर किसने हस्ताक्षर किए? उन्होंने कहा कि मातोश्री के उस कमरे में किसी को भी जाने की अनुमति नहीं थी जहां बालासाहेब को रखा गया था.