एमपी के योग केंद्रों में शादियां हो रही हैं जबकि इन्हें योगाभ्यास के लिए बनाया गया था. योग आयोग के गठन के बावजूद योग्य विशेषज्ञ और स्थायी शिक्षक की कमी बनी हुई है. सरकारी वेबसाइट भी सही से कार्य नहीं कर रही और आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं है.