आयतुल्लाह खामेनेई की मौत को शिया समुदाय ने हजरत अली की शहादत के समान गंभीर घटना माना है जो रमजान महीने में हुई मौलाना कल्बे रूशेद रिज़वी ने बताया कि खामेनेई ने मौत को गले लगाया और अपने लोगों के साथ रहने का संकल्प जताया था शिया मुस्लिमों के लिए खामेनी का निधन एक बड़ा नुकसान है क्योंकि शहादत उनकी धार्मिक पहचान और इतिहास का हिस्सा है