सूत्रों के मुताबिक, एक वक्त यासीन मलिक ISI और लश्कर से जान बख्शने की भीख मांग रहा था. 2012 में लश्कर के ऑपरेटिव हिलाल डार को यासीन मलिक की हत्या की जिम्मेदारी दी गई थी. पाकिस्तानी एजेंसियों और आतंकियों को यासीन मलिक की वफादारी पर शक होने लगा था.