UPA सरकार ने 2004 से 2010 के बीच पेट्रोल-डीजल के दामों की कंट्रोल करने के लिए ऑयल बॉन्ड जारी किए थे. मार्च 2026 तक ₹1.34 लाख करोड़ के ऑयल बॉन्ड कर्ज का भुगतान ब्याज सहित पूरी तरह कर दिया गया है. कीमतों में ऑयल बॉन्ड के अलावा अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमत और टैक्स भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.