सूत्रों के मुताबिक, RSS अपनी प्रशंसा करने वाली जगदीप धनखड़ की टिप्पणियों से प्रसन्न नहीं था. जगदीप धनखड़ ने राज्य सभा में यहां तक कह डाला था कि RSS की आलोचना करना संविधान के खिलाफ है. उन्होंने बताया कि वे पिछले 25 वर्षों से आरएसएस के प्रशंसक हैं और इसकी तुलना उन्होंने एकलव्य से की थी.