रामभद्राचार्य द्वारा संत प्रेमानंद पर की गई टिप्पणी से संत समाज में व्यापक विरोध और रोष उत्पन्न हुआ है. संतों ने रामभद्राचार्य के बयान को सनातन धर्म की एकता के लिए हानिकारक और अनावश्यक विवादजनक बताया है. प्रेमानंद के समर्थकों ने उन्हें महान और दिव्य संत करार देते हुए रामभद्राचार्य के बयान को निंदनीय बताया है.