माओवादी भूपति ने 4 दशक बाद 14 अक्टूबर 2025 को गढ़चिरोली में आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया भूपति ने बताया कि शांति वार्ता और सरकार की इच्छाशक्ति के कारण हिंसा छोड़कर राजनीति में आने का फैसला किया माओवादी आंदोलन में कई कानूनों का विरोध करना उनकी गलती थी, जिससे स्थानीय संघर्षों का रास्ता बंद हुआ