आदिवासियों के पास न तो रोजगार है, न ही पेट भरने के लिए पर्याप्त अनाज लॉकडाउन ने भूमिहीन आदिवासियों से रोजगार छीन लिया पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलता सरकारी राशन