सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने 1978 के मथुरा रेप केस के फैसले को संस्थागत शर्मिंदगी बताया है. मथुरा रेप केस में दो पुलिसकर्मियों पर हिरासत में रेप का आरोप लगा था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने अभियुक्तों की बरी करने का कारण पीड़िता की सहमति न होने के प्रमाण की कमी बताया था.