नालंदा दुनिया का सबसे प्राचीन आवासीय विश्वविद्यालय था, जहां हजारों विद्यार्थी और विद्वान अध्ययन करते थे. नालंदा में विषयों के बीच ज्ञान का समन्वित प्रवाह था, जहां वाद-विवाद सत्य की खोज के लिए किए जाते थे आक्रमण के बाद भी नालंदा का ज्ञान तिब्बत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैलता रहा और पांडुलिपियां संरक्षित हुईं