सिल्क सारी पहनना हर महिला को पसंद होता है. क्योंकि ये न सिर्फ उनकी सुंदरता को बढ़ाने का काम करती है बल्कि, संस्कृति की छाप भी छोड़ती है.
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7 टिप्स
अगर आप भी सिल्क साड़ी खरीदने का प्लान बना रही हैं, तो तो इन 7 आसान ट्रिक्स से मिनटों में करें असली और नकली सिल्क का फर्क.
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बर्निंग टेस्ट
साड़ी के किनारे से एक धागा निकालकर उसे जलाएं. अगर जलने पर 'बालों के जलने' जैसी गंध आए और उसकी राख काली हो, तो सिल्क असली है.
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हाथ से रगड़कर
असली सिल्क को जब आप अपनी हथेलियों के बीच रगड़ेंगी, तो उसमें थोड़ी गर्मी महसूस होगी. इसमें नेचुरल फाइबर होता है, जो रगड़ने पर वह गर्म हो जाता है.
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रिंग टेस्ट
अपनी एक उंगली की अंगूठी निकालें और साड़ी को उसके बीच से गुजारें. असली सिल्क इतना सॉफ्ट और लचीला होता है कि वह आसानी से छोटी सी अंगूठी के बीच से निकल जाएगा.
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साड़ी की चमक
नकली सिल्क में एक जैसी, सफेद सी चमक होती है. लेकिन असली सिल्क की चमक खास होती है. इसे जब आप अलग-अलग एंगल से देखेंगी, तो इसका रंग हल्का बदलता हुआ सा दिखेगा.
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जरी के काम
सिल्क साड़ियों पर अक्सर जरी का काम होता है. असली जरी में चांदी या सोने के तारों का इस्तेमाल होता है. इसे पहचानने के लिए साड़ी को उल्टा करके देखें.
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कीमत
अगर कोई आपको बहुत कम दाम (जैसे 1000 या 1500 रुपये) में 'प्योर कांजीवरम' या 'बनारसी सिल्क' दे रहा है, तो समझ जाइए कि दाल में कुछ काला है.
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टेक्सचर
असली सिल्क बहुत ही मुलायम और स्मूथ होता है. इसे हाथ लगाने पर मखमली अहसास होता है. वहीं नकली सिल्क छूने पर थोड़ा कड़ा या प्लास्टिक जैसा महसूस हो सकता है.
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नोट
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ से सलाह लें.