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गर्मी शुरू होते ही बाजार में 100-200 रुपये वाले काले चश्मों की भरमार दिखने लगती है. लोग इन्हें फैशन, स्टाइल और धूप से बचने के लिए खरीद लेते हैं.
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लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि सस्ते और सबस्टैंडर्ड सनग्लासेस सिर्फ रोशनी कम करते हैं, लेकिन खतरनाक UV किरणों को नहीं रोक पाते.
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यही वजह है कि आंखों के डॉक्टर हमेशा UV400 प्रोटेक्शन वाले चश्मे इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं.
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सस्ते गॉगल्स में सही UV फिल्टर नहीं होता, ऐसे में हानिकारक UV-A और UV-B किरणें आंखों के अंदर ज्यादा गहराई तक पहुंच सकती हैं. जो एक समय बाज आंखों के लेंस और रेटिना पर बुरा असर डाल सकता है.
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लगातार ज्यादा UV एक्सपोजर आंखों में कई तरह की समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है. असली सुरक्षा तभी मिलती है जब चश्मा UV400 प्रोटेक्शन देता हो.
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UV400 प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस UVA और UVB दोनों तरह की किरणों को ब्लॉक करने के लिए बनाए जाते हैं. ये ग्लासेस हानिकारक UV किरणों को रोकते हैं.
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जिससे ये किरणें रेटिना और आंखों के लेंस को नुकसान नहीं पहुंचा पातीं. यही कारण है कि धूप में बाहर निकलते समय ऐसा चश्मा आंखों को बेहतर सुरक्षा दे सकता है.
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इसलिए सनग्लास खरीदते वक्त सिर्फ डिजाइन या ब्रांड नहीं, बल्कि UV400 लेबल जरूर चेक करना चाहिए. बहुत सस्ते और बिना सर्टिफिकेशन वाले चश्मों से बचना ही बेहतर है.
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